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Rigveda Mandal 6 / Sukta 54 / Mantra 9

75 Sukta
10 Mantra
6/54/9
Devata- पूषा Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पूष॒न्तव॑ व्र॒ते व॒यं न रि॑ष्येम॒ कदा॑ च॒न। स्तो॒तार॑स्त इ॒ह स्म॑सि ॥९॥

पूष॑न् । तव॑ । व्र॒ते । व॒यम् । न । रि॒ष्ये॒म॒ । कदा॑ । च॒न । स्तो॒तारः॑ । ते॒ । इ॒ह । स्म॒सि॒ ॥

Mantra without Swara
पूषन्तव व्रते वयं न रिष्येम कदा चन। स्तोतारस्त इह स्मसि ॥

पूषन्। तव। व्रते। वयम्। न। रिष्येम। कदा। चन। स्तोतारः। ते। इह। स्मसि ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 20 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
हे (पूषन्) पालन करनेवाले धर्मात्मन् ! जिस (ते) आपके (इह) इस संसार में (स्तोतारः) विद्या की स्तुति करनेवाले (वयम्) हम लोग (स्मसि) हैं उस (तव) आपके (व्रते) कर्म में (कदा, चन) कभी भी हम लोग (न, रिष्येम) नष्टकर्त्ता न होवें ॥९॥
Essence
जो सत्यविद्याओं की प्रशंसा करनेवाले मनुष्य हों, वे विद्वानों के काम में हिंसा करनेवाले न हों ॥९॥
Subject
कौन किसमें अहिंसक हों, इस विषय को कहते हैं ॥

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