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Rigveda Mandal 6 / Sukta 54 / Mantra 1

75 Sukta
10 Mantra
6/54/1
Devata- पूषा Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सं पू॑षन्वि॒दुषा॑ नय॒ यो अञ्ज॑सानु॒शास॑ति। य ए॒वेदमिति॒ ब्रव॑त् ॥१॥

सम् । पू॒ष॒न् । वि॒दुषा॑ । न॒य॒ । यः । अञ्ज॑सा । अ॒नु॒ऽशास॑ति । यः । ए॒व । इ॒दम् इति॑ । ब्रव॑त् ॥

Mantra without Swara
सं पूषन्विदुषा नय यो अञ्जसानुशासति। य एवेदमिति ब्रवत् ॥

सम्। पूषन्। विदुषा। नय। यः। अञ्जसा। अनुऽशासति। यः। एव। इदम् इति। ब्रवत् ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 19 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (पूषन्) पुष्टि करनेवाले विद्वन् ! (यः) जो (इदम्) यह (एव) इसी प्रकार है (इति) ऐसा (ब्रवत्) उपदेश करे (यः) जो सत्य के (अनुशासति) अनुकूल शिक्षा दे उस (विदुषा) विद्वान् के साथ हम लोगों को (अञ्जसा) साक्षात् (सम्, नय) अच्छे प्रकार उन्नति को पहुँचाओ ॥१॥
Essence
हे विद्वन् ! हम लोगों को जो सत्यविद्या का उपदेश करें, उनका सत्कार कर उनके सङ्ग से हम लोग विद्वान् होकर उपदेशकर्त्ता हों ॥१॥
Subject
अब दश ऋचावाले चौवनवें सूक्त का आरम्भ है, इसके प्रथम मन्त्र में मनुष्यों को किसका सङ्ग चाहने योग्य है, इस विषय को कहते हैं ॥