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Rigveda Mandal 6 / Sukta 53 / Mantra 9

75 Sukta
10 Mantra
6/53/9
Devata- पूषा Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
या ते॒ अष्ट्रा॒ गोओ॑प॒शाघृ॑णे पशु॒साध॑नी। तस्या॑स्ते सु॒म्नमी॑महे ॥९॥

या । ते॒ । अष्ट्रा॑ । गोऽओ॑पशा । आघृ॑णे । प॒शु॒ऽसाध॑नी । तस्याः॑ । ते॒ । सु॒म्नम् । ई॒म॒हे॒ ॥

Mantra without Swara
या ते अष्ट्रा गोओपशाघृणे पशुसाधनी। तस्यास्ते सुम्नमीमहे ॥

या। ते। अष्ट्रा। गोऽओपशा। आघृणे। पशुऽसाधनी। तस्याः। ते। सुम्नम्। ईमहे ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 18 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
हे (आघृणे) सब ओर से पशुविद्या के प्रकाश करनेवाले (या) जो (ते) आपकी (अष्ट्रा) व्याप्त होनेवाली (गोओपशा) जिसमें गौएँ परस्पर सोती हैं और (पशुसाधनी) जिससे पशुओं को सिद्ध करते हैं, वह क्रिया वर्त्तमान है (तस्याः) उससे (ते) आपके (सुम्नम्) सुख को हम लोग (ईमहे) जाँचते अर्थात् माँगते हैं ॥९॥
Essence
हे मनुष्यो ! जिस क्रिया से पशु बढ़ें, उस क्रिया को बढ़ाकर सुख को माँगो ॥९॥
Subject
मनुष्यों को क्या बढ़ा कर किसकी प्रार्थना करनी चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

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