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Rigveda Mandal 6 / Sukta 53 / Mantra 7

75 Sukta
10 Mantra
6/53/7
Devata- पूषा Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ रि॑ख किकि॒रा कृ॑णु पणी॒नां हृद॑या कवे। अथे॑म॒स्मभ्यं॑ रन्धय ॥७॥

आ । रि॒ख॒ । कि॒कि॒रा । कृ॒णु॒ । प॒णी॒नाम् । हृद॑या । क॒वे॒ । अथ॑ । ई॒म् । अ॒स्मभ्य॑म् । र॒न्ध॒य॒ ॥

Mantra without Swara
आ रिख किकिरा कृणु पणीनां हृदया कवे। अथेमस्मभ्यं रन्धय ॥

आ। रिख। किकिरा। कृणु। पणीनाम्। हृदया। कवे। अथ। ईम्। अस्मभ्यम्। रन्धय ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 18 Mantra » 2

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Meaning
हे (कवे) विद्वन् ! आप (पणीनाम्) व्यवहार करनेवालों के (किकिरा) व्यवस्थापत्रों को (आ, रिख) सब ओर से लिखो तथा दुष्टों के (हृदया) हृदयों को (रन्धय) अति पीड़ा देओ (अथ) इसके अनन्तर (अस्मभ्यम्) हम लोगों के लिये (ईम्) सुख (कृणु) करो ॥७॥
Essence
राजा वादी और प्रतिवादी अर्थात् झगड़ालु प्रतिझगड़ालूओं का लिखापढ़ी पूर्वक न्याय करे ॥७॥
Subject
फिर राजा क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥

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