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Rigveda Mandal 6 / Sukta 53 / Mantra 3

75 Sukta
10 Mantra
6/53/3
Devata- पूषा Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अदि॑त्सन्तं चिदाघृणे॒ पूष॒न्दाना॑य चोदय। प॒णेश्चि॒द्वि म्र॑दा॒ मनः॑ ॥३॥

अदि॑त्सन्तम् । चि॒त् । आ॒घृ॒णे॒ । पूष॑न् । दाना॑य । चो॒द॒य॒ । प॒णेः । चि॒त् । वि । म्र॒द॒ । मनः॑ ॥

Mantra without Swara
अदित्सन्तं चिदाघृणे पूषन्दानाय चोदय। पणेश्चिद्वि म्रदा मनः ॥

अदित्सन्तम्। चित्। आघृणे। पूषन्। दानाय। चोदय। पणेः। चित्। वि। म्रद। मनः ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 17 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (आघृणे) सब ओर से प्रकाशात्मन् (पूषन्) पुष्टि करनेवाले विद्वन् ! आप (अदित्सन्तम्) देने की अनिच्छा करते हुए (चित्) भी देनेवाले को (दानाय) देने के लिये (चोदय) प्रेरणा देओ (चित्) फिर भी देनेवालो को और अपने (मनः) मन को भी प्रेरणा देओ और (पणेः) जुआ खेलनेवाले के भी अन्तःकरण को (वि, म्रदा) विशेषता से मर्दो अर्थात् दण्ड देओ ॥३॥
Essence
हे अध्यापक, उपदेशक वा राजन् ! विद्यादि शुभगुणों की प्रवृत्ति के लिये न देनेवालों को भी दान करने के लिये प्रेरणा देओ और जुआ खेलनेवाले पाखण्डियों को मारो अर्थात् ताड़ना देओ ॥३॥
Subject
फिर विद्वान् जन किसके लिये क्या प्रेरणा करे, इस विषय को कहते हैं ॥