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Rigveda Mandal 6 / Sukta 53 / Mantra 2

75 Sukta
10 Mantra
6/53/2
Devata- पूषा Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒भि नो॒ नर्यं॒ वसु॑ वी॒रं प्रय॑तदक्षिणम्। वा॒मं गृ॒हप॑तिं नय ॥२॥

अ॒भि । नः॒ । नर्य॑म् । वसु॑ । वी॒रम् । प्रय॑तऽदक्षिणम् । वा॒मम् । गृ॒हऽप॑तिम् । न॒य॒ ॥

Mantra without Swara
अभि नो नर्यं वसु वीरं प्रयतदक्षिणम्। वामं गृहपतिं नय ॥

अभि। नः। नर्यम्। वसु। वीरम्। प्रयतऽदक्षिणम्। वामम्। गृहऽपतिम्। नय ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 17 Mantra » 2

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Meaning
हे पुष्टि करनेवाले ! आप (नः) हम लोगों को (प्रयतदक्षिणम्) जिससे प्रयत्नपूर्वक दक्षिणा दी गई उस (नर्यम्) मनुष्यों में उत्तम (वसु) धन और (वामम्) प्रशंसित (वीरम्) शुभलक्षणयुक्त पुरुष को (गृहपतिम्) गृहस्वामी को भी (अभि, नय) सब ओर से पहुँचाओ ॥२॥
Essence
हे विद्वन् वा विदुषी ! आप हम लोगों के लिये उत्तम पति, उत्तम भार्या, प्रशंसित धन की प्राप्ति करा के उत्तम शिक्षा से धर्म्म आचरण की प्राप्ति कराइये ॥२॥
Subject
अब स्त्रीपुरुषों को क्या चाहने योग्य है, इस विषय को कहते हैं ॥