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Rigveda Mandal 6 / Sukta 52 / Mantra 8

75 Sukta
17 Mantra
6/52/8
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यो वो॑ देवा घृ॒तस्नु॑ना ह॒व्येन॑ प्रति॒भूष॑ति। तं विश्व॒ उप॑ गच्छथ ॥८॥

यः । वः॒ । दे॒वाः॒ । घृ॒तऽस्नु॑ना । ह॒व्येन॑ । प्र॒ति॒ऽभूष॑ति । तम् । विश्वे॑ । उप॑ । ग॒च्छ॒थ॒ ॥

Mantra without Swara
यो वो देवा घृतस्नुना हव्येन प्रतिभूषति। तं विश्व उप गच्छथ ॥

यः। वः। देवाः। घृतऽस्नुना। हव्येन। प्रतिऽभूषति। तम्। विश्वे। उप। गच्छथ ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 15 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (देवाः) पढ़ाने और उपदेश करनेवाले विद्वानो ! (यः) जो (घृतस्नुना) घृत के समान शुद्ध (हव्येन) लेने-देने योग्य वा प्रशंसित पढ़ने और सुनने से (वः) तुम लोगों को (प्रतिभूषति) प्रत्यक्षता से सुभूषित करता है (तम्) उसके (विश्वे) सब तुम लोग (उप, गच्छथ) समीप प्राप्त होओ ॥८॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो सत्य विद्यादान से सब तुम लोगों को सुभूषित करता है, उसे तुम सब प्रतिभूषित करो अर्थात् बदले में सुशोभित करो ॥८॥
Subject
फिर अध्यापक और अध्ययन करनेवाले परस्पर कैसे वर्त्ताव करें, इस विषय को कहते हैं ॥