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Rigveda Mandal 6 / Sukta 52 / Mantra 7

75 Sukta
17 Mantra
6/52/7
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विश्वे॑ देवास॒ आ ग॑त शृणु॒ता म॑ इ॒मं हव॑म्। एदं ब॒र्हिर्नि षी॑दत ॥७॥

विश्वे॑ । दे॒वा॒सः॒ । आ । ग॒त॒ । शृ॒णु॒त । मे॒ । इ॒मम् । हव॑म् । आ । इ॒दम् । ब॒र्हिः । नि । सी॒द॒त॒ ॥

Mantra without Swara
विश्वे देवास आ गत शृणुता म इमं हवम्। एदं बर्हिर्नि षीदत ॥

विश्वे। देवासः। आ। गत। शृणुत। मे। इमम्। हवम्। आ। इदम्। बर्हिः। नि। सीदत ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 15 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (विश्वे, देवासः) सब विद्वानो ! तुम हमारे अति समीप (आ, गत) आओ तथा (इदम्) इस (बर्हिः) उत्तम आसन पर (नि, सीदत) निरन्तर स्थिर होओ तथा (मे) मुझ विद्यार्थी के (इमम्) इस (हवम्) सुने पढ़े विषय को (आ, शृणुता) अच्छे प्रकार सुनो ॥७॥
Essence
इस मन्त्र में नेदिष्ठम् यह पद पिछले मन्त्र से अनुवृत्ति में आता है। विद्यार्थियों को चाहिये कि परीक्षा करनेवाले विद्वानों की प्रार्थना कर परीक्षा में सुनाने योग्य समस्त सुना और पढ़ा विषय उनके समीप में निवेदन करें तथा वे परीक्षक भी अच्छे प्रकार परीक्षा कर गुण और दोषों का उपदेश दें, ऐसा करने पर पढ़ना निर्दोष हो ॥७॥
Subject
फिर पढ़नेवालों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥