Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 52 / Mantra 14

75 Sukta
17 Mantra
6/52/14
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
विश्वे॑ दे॒वा मम॑ शृण्वन्तु य॒ज्ञिया॑ उ॒भे रोद॑सी अ॒पां नपा॑च्च॒ मन्म॑। मा वो॒ वचां॑सि परि॒चक्ष्या॑णि वोचं सु॒म्नेष्विद्वो॒ अन्त॑मा मदेम ॥१४॥

विश्वे॑ । दे॒वाः । मम॑ । शृ॒ण्व॒न्तु॒ । य॒ज्ञियाः॑ । उ॒भे इति॑ । रोद॑सी॒ इति॑ । अ॒पाम् । नपा॑त् । च॒ । मन्म॑ । मा । वः॒ । वचां॑सि । प॒रि॒ऽचक्ष्या॑णि । वो॒च॒म् । सु॒म्नेषु॑ । इत् । वः॒ । अन्त॑माः । म॒दे॒म॒ ॥

Mantra without Swara
विश्वे देवा मम शृण्वन्तु यज्ञिया उभे रोदसी अपां नपाच्च मन्म। मा वो वचांसि परिचक्ष्याणि वोचं सुम्नेष्विद्वो अन्तमा मदेम ॥

विश्वे। देवाः। मम। शृण्वन्तु। यज्ञियाः। उभे इति। रोदसी इति। अपाम्। नपात्। च। मन्म। मा। वः। वचांसि। परिऽचक्ष्याणि। वोचम्। सुम्नेषु। इत्। वः। अन्तमाः। मदेम ॥१४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 16 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (विश्वे, देवाः) सब विद्वानो ! आप (उभे) दोनों (रोदसी) आकाश और पृथिवी के तुल्य सब की रक्षा करनेवाले (यज्ञियाः) सज्जनों का सङ्ग करनेवाले होते हुए (मम) मेरे (वचांसि) वचनों को (शृण्वन्तु) सुनिये तथा (वः) आपके (अपाम्) प्राणों के (नपात्) न विनाश करनेवाले (मन्म) विज्ञान को, विरुद्ध मैं (मा, वोचम्) मत कहूँ (परिचक्ष्याणि, च) और सब ओर से कहने के योग्यों की प्रशंसा करूँ, इस प्रकार वर्त्तमान हम लोग (वः) आपके (अन्तमाः) समीप स्थिर होते हुए (सुम्नेषु) सुखों में (इत्) सर्वदैव (मदेम) आनन्दित हों ॥१४॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जिन विद्वानों का वचन असत्य नहीं होता तथा जिनका सङ्ग सर्वदा सुख और विज्ञान का बढ़ानेवाला है और जो भूमि और सूर्य के तुल्य सब के पालनेवाले और विवाद सुनकर पक्षपात को छोड़ न्याय करनेवाले हों, उनके निकट स्थित होकर सदैव आनन्द को प्राप्त होओ ॥१४॥
Subject
फिर कौन सङ्ग करने योग्य हैं, इस विषय को कहते हैं ॥