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Rigveda Mandal 6 / Sukta 52 / Mantra 10

75 Sukta
17 Mantra
6/52/10
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विश्वे॑ दे॒वा ऋ॑ता॒वृध॑ ऋ॒तुभि॑र्हवन॒श्रुतः॑। जु॒षन्तां॒ युज्यं॒ पयः॑ ॥१०॥

विश्वे॑ । दे॒वाः । ऋ॒त॒ऽवृधः॑ । ऋ॒तुऽभिः॑ । ह॒व॒न॒ऽश्रुतः॑ । जु॒षन्ता॑म् । युज्य॑म् । पयः॑ ॥

Mantra without Swara
विश्वे देवा ऋतावृध ऋतुभिर्हवनश्रुतः। जुषन्तां युज्यं पयः ॥

विश्वे। देवाः। ऋतऽवृधः। ऋतुऽभिः। हवनऽश्रुतः। जुषन्ताम्। युज्यम्। पयः ॥१०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 15 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (ऋतावृधः) सत्य विद्या के बढ़ानेवालो (हवनश्रुतः) जो अध्ययन को सुनते हैं, वे (विश्वे, देवाः) सब विद्वान् ! आप लोग (ऋतुभिः) वसन्तादिकों के साथ (युज्यम्) समाधान करने योग्य (पयः) दूध, जल वा अन्न को (जुषन्ताम्) सेवें ॥१०॥
Essence
जो अध्ययन करने और परीक्षा कराने को चाहें वे मद करने, कुत्सित बुद्धि वा नाश करनेवाले पदार्थों को छोड़ के दुग्ध आदि बुद्धि के बढ़ानेवाले उत्तम पदार्थों को सेवें ॥१०॥
Subject
फिर मनुष्य क्या कामना कर विद्याओं को प्राप्त होवें, इस विषय को कहते हैं ॥