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Rigveda Mandal 6 / Sukta 51 / Mantra 8

75 Sukta
16 Mantra
6/51/8
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नम॒ इदु॒ग्रं नम॒ आ वि॑वासे॒ नमो॑ दाधार पृथि॒वीमु॒त द्याम्। नमो॑ दे॒वेभ्यो॒ नम॑ ईश एषां कृ॒तं चि॒देनो॒ नम॒सा वि॑वासे ॥८॥

नमः॑ । इत् । उ॒ग्रम् । नमः॑ । आ । वि॒वा॒से॒ । नमः॑ । दा॒धा॒र॒ । पृ॒थि॒वीम् । उ॒त । द्याम् । नमः॑ । दे॒वेभ्यः॑ । नमः॑ । ई॒शे॒ । ए॒षा॒म् । कृ॒तम् । चि॒त् । एनः॑ । न॒म॒सा । आ । वि॒वा॒से॒ ॥

Mantra without Swara
नम इदुग्रं नम आ विवासे नमो दाधार पृथिवीमुत द्याम्। नमो देवेभ्यो नम ईश एषां कृतं चिदेनो नमसा विवासे ॥

नमः। इत्। उग्रम्। नमः। आ। विवासे। नमः। दाधार। पृथिवीम्। उत। द्याम्। नमः। देवेभ्यः। नमः। ईशे। एषाम्। कृतम्। चित्। एनः। नमसा। आ। विवासे ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 12 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (नमः) नमस्कार करने योग्य ब्रह्म (पृथिवीम्) भूमि (उत) और (द्याम्) सूर्य को (दाधार) धारण करते उस (उग्रम्) तीव्र (नमः) नमस्कार करने योग्य ब्रह्म का मैं (आ, विवासे) सेवन करूँ (देवेभ्यः) विद्वानों के लिये (नमः) अन्न की सेवा करूँ (नमः) सत्कार वा (नमः) अन्न की (ईशे) इच्छा करूँ उस (नमसा) सत्कार से (एषाम्) इनके (कृतम्) किये उत्तम कर्म (चित्) और (एनः) अनुत्तम कर्म का (इत्) ही (आ, निवासे) योग्य सेवन करूँ ॥८॥
Essence
हे मनुष्यो ! सब से नमस्कार करने योग्य परमेश्वर के सहायरूप से हम लोग उत्तम क्रिया को धारण कर और दुष्टता को निवार विद्वानों के लिये हित सिद्ध कर सबका उपकार सदैव करें ॥८॥
Subject
मनुष्य सदैव नम्र हों, इस विषय को कहते हैं ॥