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Rigveda Mandal 6 / Sukta 51 / Mantra 12

75 Sukta
16 Mantra
6/51/12
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नू स॒द्मानं॑ दि॒व्यं नंशि॑ देवा॒ भार॑द्वाजः सुम॒तिं या॑ति॒ होता॑। आ॒सा॒नेभि॒र्यज॑मानो मि॒येधै॑र्दे॒वानां॒ जन्म॑ वसू॒युर्व॑वन्द ॥१२॥

नु । स॒द्मान॑म् । दि॒व्यम् । नंशि॑ । दे॒वाः॒ । भार॑त्ऽवाजः । सु॒ऽम॒तिम् । या॒ति॒ । होता॑ । आ॒सा॒नेभिः॑ । यज॑मानः । मि॒येधैः॑ । दे॒वाना॑म् । जन्म॑ । व॒सु॒ऽयुः । व॒व॒न्द॒ ॥

Mantra without Swara
नू सद्मानं दिव्यं नंशि देवा भारद्वाजः सुमतिं याति होता। आसानेभिर्यजमानो मियेधैर्देवानां जन्म वसूयुर्ववन्द ॥

नु। सद्मानम्। दिव्यम्। नंशि। देवाः। भारत्ऽवाजः। सुऽमतिम्। याति। होता। आसानेभिः। यजमानः। मियेधैः। देवानाम्। जन्म। वसुऽयुः। ववन्द ॥१२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 13 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (देवा) विद्वानो ! जो (भारद्वाजः) विज्ञान को धारण किये (होता) देनेवाला (सुमतिम्) शोभन बुद्धि को (याति) प्राप्त होता है वह (नू) शीघ्र (दिव्यम्) मनोहर (सद्मानम्) जिसमें स्थिर होता उस घर को (नंशि) व्याप्त होता है। जो (वसूयुः) द्रव्यों की कामना करने और (यजमानः) यज्ञ करनेवाला (मियेधैः) प्रेरणा देनेवाले (आसानेभिः) बैठे हुए ऋत्विजों के साथ (देवानाम्) विद्वानों के (जन्म) उत्पन्न होने की (ववन्द) प्रशंसा करता है, उसका तुम सत्कार करो ॥१२॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो राजा के विद्या और जन्म की प्रशंसा करते, वे शुद्ध सुख को प्राप्त होते हैं, जैसे बहुत विद्वानों के साथ यज्ञ करनेवाला यज्ञ को सुभूषित कर समस्त जगत् का उपकार करता है, वैसे ही विद्वान् जन पढ़ाने और उपदेशों से सब को प्राज्ञ (उत्तम ज्ञाता) कर प्रशंसा को प्राप्त होते हैं ॥१२॥
Subject
फिर कौन धन्यवाद के योग्य हैं, इस विषय को कहते हैं ॥