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Rigveda Mandal 6 / Sukta 5 / Mantra 2

75 Sukta
7 Mantra
6/5/2
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
त्वे वसू॑नि पुर्वणीक होतर्दो॒षा वस्तो॒रेरि॑रे य॒ज्ञिया॑सः। क्षामे॑व॒ विश्वा॒ भुव॑नानि॒ यस्मि॒न्त्सं सौभ॑गानि दधि॒रे पा॑व॒के ॥२॥

त्वे इति॑ । वसू॑नि । पु॒रु॒ऽअ॒णी॒क॒ । हो॒तः॒ । दो॒षा । वस्तोः॑ । आ । ई॒रि॒रे॒ । य॒ज्ञिया॑सः । क्षाम॑ऽइव । विश्वा॑ । भुव॑नानि । यस्मि॑न् । सम् । सौभ॑गानि । द॒धि॒रे । पा॒व॒के ॥

Mantra without Swara
त्वे वसूनि पुर्वणीक होतर्दोषा वस्तोरेरिरे यज्ञियासः। क्षामेव विश्वा भुवनानि यस्मिन्त्सं सौभगानि दधिरे पावके ॥

त्वे इति। वसूनि। पुरुऽअणीक। होतः। दोषा। वस्तोः। आ। ईरिरे। यज्ञियासः। क्षामऽइव। विश्वा। भुवनानि। यस्मिन्। सम्। सौभगानि। दधिरे। पावके ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 7 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (पुर्वणीक) अनेक सेनाओं से युक्त (होतः) दान करनेवाले राजन् ! (यस्मिन्) जिन (पावके) अग्नि के सदृश पवित्र (त्वे) आपके रक्षक रहने पर (यज्ञियासः) यज्ञ के अनुष्ठान करने के योग्य प्रजाजन (दोषा) रात्रि में और (वस्तोः) दिन में (क्षामेव) जैसे पृथिवी, वैसे (विश्वा) सम्पूर्ण (भुवनानि) लोकों में प्रकट और पञ्चभूत अधिकरण जिनके उन प्राणियों की और (वसूनि) धनों को (आ, ईरिरे) प्रेरणा करते और (सौभगानि) श्रेष्ठ ऐश्वर्य्यों के भावों को (सम्, दधिरे) सम्यक् धारण करते हैं, उनका हम लोग सत्कार करें ॥२॥
Essence
राजा के रक्षक रहने पर ही प्रजाजन प्रतिदिन वृद्धि को प्राप्त होते और ऐश्वर्य्य को प्राप्त होकर सुखयुक्त होते हैं ॥२॥
Subject
मनुष्यों को किसके होने पर क्या प्राप्त होना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥