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Rigveda Mandal 6 / Sukta 5 / Mantra 1

75 Sukta
7 Mantra
6/5/1
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
हु॒वे वः॑ सू॒नुं सह॑सो॒ युवा॑न॒मद्रो॑घवाचं म॒तिभि॒र्यवि॑ष्ठम्। य इन्व॑ति॒ द्रवि॑णानि॒ प्रचे॑ता वि॒श्ववा॑राणि पुरु॒वारो॑ अ॒ध्रुक् ॥१॥

हु॒वे । वः॒ । सू॒नुम् । सह॑सः । युवा॑नम् । अद्रो॑घऽवाचम् । म॒तिऽभिः॑ । यवि॑ष्ठम् । यः । इन्व॑ति । द्रवि॑णानि । प्रऽचे॑ताः । वि॒श्वऽवा॑राणि । पु॒रु॒ऽवारः॑ । अ॒ध्रुक् ॥

Mantra without Swara
हुवे वः सूनुं सहसो युवानमद्रोघवाचं मतिभिर्यविष्ठम्। य इन्वति द्रविणानि प्रचेता विश्ववाराणि पुरुवारो अध्रुक् ॥

हुवे। वः। सूनुम्। सहसः। युवानम्। अद्रोघऽवाचम्। मतिऽभिः। यविष्ठम्। यः। इन्वति। द्रविणानि। प्रऽचेताः। विश्वऽवाराणि। पुरुऽवारः। अध्रुक् ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 7 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (यः) जो (प्रचेताः) उत्तम बुद्धियुक्त (पुरुवारः) बहुतों से स्वीकार किया गया (अध्रुक्) नहीं द्रोह करनेवाला जन (विश्ववाराणि) सम्पूर्ण जनों से स्वीकार करने योग्य (द्रविणानि) द्रव्यों को (इन्वति) व्याप्त होता है उस (मतिभिः) मनुष्यों वा बुद्धियों के सहित वर्त्तमान (सहसः) बल के (सूनुम्) सन्तान (युवानम्) युवावस्था को प्राप्त (अद्रोघवाचम्) द्रोहरहितवाणी जिसकी ऐसे (यविष्ठम्) अतिशय युवावस्था को प्राप्त हुए को (वः) आप लोगों के लिये मैं (हुवे) ग्रहण करता हूँ ॥१॥
Essence
हे मनुष्यो ! आप लोगों को चाहिये कि जो पक्षपात से रहित वादयुक्त, द्रोह से रहित और बुद्धिमानों के सङ्ग का सेवन करनेवाले और बहुत विद्वानों से आदर किये गये और और ब्रह्मचर्य्य से पूर्ण युवावस्थावाले विद्वान् हों, उन्हीं का उपदेश ग्रहण करें ॥१॥
Subject
अब सात ऋचावाले पाँचवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में मनुष्यों को क्या ग्रहण करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥