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Rigveda Mandal 6 / Sukta 49 / Mantra 8

75 Sukta
15 Mantra
6/49/8
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
प॒थस्प॑थः॒ परि॑पतिं वच॒स्या कामे॑न कृ॒तो अ॒भ्या॑नळ॒र्कम्। स नो॑ रासच्छु॒रुध॑श्च॒न्द्राग्रा॒ धियं॑धियं सीषधाति॒ प्र पू॒षा ॥८॥

प॒थःऽप॑थः । परि॑ऽपतिम् । व॒च॒स्या । कामे॑न । कृ॒तः । अ॒भि । आ॒न॒ट् । अ॒र्कम् । सः । नः॒ । रा॒स॒त् । शु॒रुधः॑ । च॒न्द्रऽअ॑ग्राः । धिय॑म्ऽधियम् । सी॒स॒धा॒ति॒ । प्र । पू॒षा ॥

Mantra without Swara
पथस्पथः परिपतिं वचस्या कामेन कृतो अभ्यानळर्कम्। स नो रासच्छुरुधश्चन्द्राग्रा धियंधियं सीषधाति प्र पूषा ॥

पथःऽपथः। परिऽपतिम्। वचस्या। कामेन। कृतः। अभि। आनट्। अर्कम्। सः। नः। रासत्। शुरुधः। चन्द्रऽअग्राः। धियम्ऽधियम्। सीसधाति। प्र। पूषा ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 6 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
जो (पूषा) पुष्टि करनेवाला (कामेन) कामना से (पथस्पथः) मार्गों मार्गों को (परिपतिम्) स्वामी को छोड़ के वा सब ओर से स्वामी को और (वचस्या) वचन में उत्तम व्यवहारों को (कृतः) किये हुए (अर्कम्) सत्कार करने योग्य क्रियामय व्यवहार को (अभि, आनट्) सब ओर से व्याप्त होता है तथा (नः) हम लोगों के लिये (शुरुधः) शीघ्र रोकनेवाली (चन्द्राग्राः) जिनके तीर सुवर्ण उत्तम विद्यमान उनको (रासत्) देवे तथा (धियंधियम्) प्रज्ञा प्रज्ञा वा कर्म कर्म को (प्र, सीषधाति) अच्छे प्रकार सिद्ध करता है (सः) वह उपदेशकर्त्ता तथा न्याय करनेवाला हम लोगों का हो ॥८॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो तुमको सन्मार्ग दिखाकर दुष्ट मार्गों का निवारण कर सत्याचरण करनेवाले स्वामी का सेवन करा और दुष्टपति का निवारण कराके बुद्धि को बढ़ाता है, वही तुम लोगों को सत्कार करने योग्य होता है ॥८॥
Subject
फिर मनुष्यों को किसका सेवन करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥