Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 49 / Mantra 7

75 Sukta
15 Mantra
6/49/7
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- ब्राह्म्युष्निक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
पावी॑रवी क॒न्या॑ चि॒त्रायुः॒ सर॑स्वती वी॒रप॑त्नी॒ धियं॑ धात्। ग्नाभि॒रच्छि॑द्रं शर॒णं स॒जोषा॑ दुरा॒धर्षं॑ गृण॒ते शर्म॑ यंसत् ॥७॥

पावी॑रवी । क॒न्या॑ । चि॒त्रऽआ॑युः । सर॑स्वती । वी॒रऽप॑त्नी । धिय॑म् । धा॒त् । ग्नाभिः॑ । अच्छि॑द्रम् । श॒र॒णम् । स॒ऽजोषाः॑ । दुः॒ऽआ॒धर्ष॑म् । गृ॒ण॒ते । शर्म॑ । यं॒स॒त् ॥

Mantra without Swara
पावीरवी कन्या चित्रायुः सरस्वती वीरपत्नी धियं धात्। ग्नाभिरच्छिद्रं शरणं सजोषा दुराधर्षं गृणते शर्म यंसत् ॥

पावीरवी। कन्या। चित्रऽआयुः। सरस्वती। वीरऽपत्नी। धियम्। धात्। ग्नाभिः। अच्छिद्रम्। शरणम्। सऽजोषाः। दुःऽआधर्षम्। गृणते। शर्म। यंसत् ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 6 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (पावीरवी) शुद्ध करनेवाली (चित्रायुः) चित्र विचित्र जिसकी आयु वह (सरस्वती) विज्ञानयुक्त (वीरपत्नी) वीर पतिवाली (कन्या) मनोहर (ग्नाभिः) सुन्दर शिक्षित वाणियों से (धियम्) शास्त्रोत्थ प्रज्ञा उत्तम बुद्धि वा कर्म को (धात्) धारण करती है वा जो (गृणते) स्तुति करनेवाले मेरे लिये (अच्छिद्रम्) छेदरहित व्यवहार को तथा जो (सजोषाः) समान प्रीति की सेवनेवाली होती हुई स्तुति करनेवाले मेरे लिये (शरणम्) आश्रय को वा जो (दुराधर्षम्) दुःख से धृष्टता के योग्य (शर्म) घर वा सुख को (यंसत्) देती है, वही मुझसे सदैव सत्कार करने योग्य है ॥७॥
Essence
जो विदुषी शुभगुण, कर्म, स्वभाववाली कन्या हो, उसी को वीर पुरुष विवाहे, जिसका सङ्ग वा प्रीति कभी नष्ट न हो तथा जो सर्वदा सुख दे, वह पत्नी पति से सर्वदा सत्कार करने योग्य है ॥७॥
Subject
फिर कैसी स्त्री सुख देवे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥