Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 49 / Mantra 4

75 Sukta
15 Mantra
6/49/4
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
प्र वा॒युमच्छा॑ बृह॒ती म॑नी॒षा बृ॒हद्र॑यिं वि॒श्ववा॑रं रथ॒प्राम्। द्यु॒तद्या॑मा नि॒युतः॒ पत्य॑मानः क॒विः क॒विमि॑यक्षसि प्रयज्यो ॥४॥

प्र । वा॒युम् । अच्छ॑ । बृ॒ह॒ती । म॒नी॒षा । बृ॒हत्ऽर॑यिम् । वि॒श्वऽवा॑रम् । र॒थ॒ऽप्राम् । द्यु॒तद्ऽया॑मा । नि॒ऽयुतः॑ । पत्य॑मानः । क॒विः । क॒विम् । इ॒य॒क्ष॒सि॒ । प्र॒य॒ज्यो॒ इति॑ प्रऽयज्यो ॥

Mantra without Swara
प्र वायुमच्छा बृहती मनीषा बृहद्रयिं विश्ववारं रथप्राम्। द्युतद्यामा नियुतः पत्यमानः कविः कविमियक्षसि प्रयज्यो ॥

प्र। वायुम्। अच्छ। बृहती। मनीषा। बृहत्ऽरयिम्। विश्वऽवारम्। रथऽप्राम्। द्युतद्ऽयामा। निऽयुतः। पत्यमानः। कविः। कविम्। इयक्षसि। प्रयज्यो इति प्रऽयज्यो ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 5 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (प्रयज्यो) उत्तमता से यज्ञ करनेवाले ! (पत्यमानः) ऐश्वर्य की इच्छा करते हुए (कविः) विद्वान् आप जो (द्युतद्यामा) जिससे विशेषकर पदार्थ प्रकाशित होते हैं ऐसी (बृहती) बड़ी (मनीषा) बुद्धि है उससे जो (बृहद्रयिम्) जिससे बहुत धन सिद्ध होता उस (विश्ववारम्) और जो समस्त उत्तम व्यवहार को स्वीकार करता वा (रथप्राम्) रथ को परिपूर्ण करता वा (कविम्) विद्वान् के समान क्रमपूर्वक बुद्धि प्राप्त होती उस (वायुम्) वायु और इसके (नियुतः) निश्चित गतिवाले वेगरूप घोड़ों को (अच्छा) (प्र, इयक्षसि) मिलते हैं तो कौन-कौन चाहे हुए पदार्थ को नहीं प्राप्त होते हैं ॥४॥
Essence
जो मनुष्य शुद्ध बुद्धि और योगाभ्यास से सर्व सुख देने तथा सर्व जगत् के धारण करनेवाले पवन को प्राणायाम में वश करते हैं, वे सर्वसुख को प्राप्त होते हैं ॥४॥
Subject
फिर मनुष्य क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥