Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 49 / Mantra 12

75 Sukta
15 Mantra
6/49/12
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- ऋजिश्वाः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
प्र वी॒राय॒ प्र त॒वसे॑ तु॒रायाजा॑ यू॒थेव॑ पशु॒रक्षि॒रस्त॑म्। स पि॑स्पृशति त॒न्वि॑ श्रु॒तस्य॒ स्तृभि॒र्न नाकं॑ वच॒नस्य॒ विपः॑ ॥१२॥

प्र । वी॒राय॑ । प्र । त॒वसे॑ । तु॒राय॑ । अज॑ । यू॒थाऽइ॑व । प॒शु॒ऽरक्षिः॑ । अस्त॑म् । सः । पि॒स्पृ॒श॒ति॒ । त॒न्वि॑ । श्रु॒तस्य॑ । स्तृऽभिः॑ । न । नाक॑म् । व॒च॒नस्य॑ । विपः॑ ॥

Mantra without Swara
प्र वीराय प्र तवसे तुरायाजा यूथेव पशुरक्षिरस्तम्। स पिस्पृशति तन्वि श्रुतस्य स्तृभिर्न नाकं वचनस्य विपः ॥

प्र। वीराय। प्र। तवसे। तुराय। अज। यूथाऽइव। पशुऽरक्षिः। अस्तम्। सः। पिस्पृशति। तन्वि। श्रुतस्य। स्तृऽभिः। न। नाकम्। वचनस्य। विपः ॥१२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 7 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (विपः) मेधावीजन (स्तृभिः) नक्षत्रों से (नाकम्) जिसमें दुःख नहीं विद्यमान उस अन्तरिक्ष को (न) जैसे (तन्वि) शरीर में (श्रुतस्य) सुने हुए (वचनस्य) वचन का वा (अजा) छाग (यूथेव) समूहों को जैसे वैसे वा (पशुरक्षिः) पशुओं की रक्षा करनेवाला (अस्तम्) घर को जैसे वैसे (वीराय) शूरता आदि गुणों से युक्त (तवसे) बढ़ानेवाले (तुराय) दुःखनाशक के लिये घर का (प्र, पिस्पृशति) अत्यन्त स्पर्श करता (सः) वह सुखों का (प्र) अच्छे प्रकार अत्यन्त स्पर्श करता है ॥१२॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। मनुष्य, जैसे भेड़ बकरी दौड़ के अपने झुण्ड को वा जैसे सायङ्काल में गोपाल घरको, वैसे समस्त विद्या के श्रवण को प्राप्त होता है ॥१२॥
Subject
फिर मनुष्य किसके तुल्य किसको प्राप्त हों, इस विषय को कहते हैं ॥