Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 48 / Mantra 9

75 Sukta
22 Mantra
6/48/9
Devata- अग्निः Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- भुरिगनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
त्वं न॑श्चि॒त्र ऊ॒त्या वसो॒ राधां॑सि चोदय। अ॒स्य रा॒यस्त्वम॑ग्ने र॒थीर॑सि वि॒दा गा॒धं तु॒चे तु नः॑ ॥९॥

त्वम् । नः॒ । चि॒त्रः । ऊ॒त्या । वसो॒ इति॑ । राधां॑सि । चो॒द॒य॒ । अ॒स्य । रा॒यः । त्वम् । अ॒ग्ने॒ । र॒थीः । अ॒सि॒ । वि॒दाः । गा॒धम् । तु॒चे । तु । नः॒ ॥

Mantra without Swara
त्वं नश्चित्र ऊत्या वसो राधांसि चोदय। अस्य रायस्त्वमग्ने रथीरसि विदा गाधं तुचे तु नः ॥

त्वम्। नः। चित्रः। ऊत्या। वसो इति। राधांसि। चोदय। अस्य। रायः। त्वम्। अग्ने। रथीः। असि। विदाः। गाधम्। तुचे। तु। नः ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 2 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (वसो) वास करानेवाले (अग्ने) बिजुली के समान पुरुषार्थी जन (चित्रः) अद्भुत पुरुषार्थ करनेवाले (त्वम्) आप (ऊत्या) रक्षा से (नः) हम लोगों के (राधांसि) समृद्ध धनों की रक्षा करो तथा (अस्य) इसके (रायः) धन की (चोदय) प्रेरणा करो जिस कारण (त्वम्) आप (विदाः) विज्ञानवान् और (रथीः) बहुत प्रशंसायुक्त रथवाले (असि) हैं इस कारण से (तु) फिर (नः) हम लोगों के (तुचे) सन्तान के लिये (गाधम्) बुद्धि विलोडने की प्रेरणा करो ॥९॥
Essence
हे विद्वन् ! आप जैसे इन हमारे सन्तानों की बुद्धि के विलोडने से विद्या प्राप्ति हो, वैसे अनुविधान कीजिये तथा जैसे पुरुषार्थी जन धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिये प्रेरणा करता है, वैसे ही आप शिक्षा दीजिये ॥९॥
Subject
फिर विद्वान् जन सन्तानों को कैसे शिक्षा दें, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.