Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 48 / Mantra 3

75 Sukta
22 Mantra
6/48/3
Devata- अग्निः Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- विराड्बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
वृषा॒ ह्य॑ग्ने अ॒जरो॑ म॒हान्वि॒भास्य॒र्चिषा॑। अज॑स्रेण शो॒चिषा॒ शोशु॑चच्छुचे सुदी॒तिभिः॒ सु दी॑दिहि ॥३॥

वृषा॑ । हि । अ॒ग्ने॒ । अ॒जरः॑ । म॒हान् । वि॒ऽभासि॑ । अ॒र्चिषा॑ । अज॑स्रेण । शो॒चिषा॑ । शोशु॑चत् । शु॒चे॒ । सु॒दी॒तिऽभिः॑ । सु । दी॒दि॒हि॒ ॥

Mantra without Swara
वृषा ह्यग्ने अजरो महान्विभास्यर्चिषा। अजस्रेण शोचिषा शोशुचच्छुचे सुदीतिभिः सु दीदिहि ॥

वृषा। हि। अग्ने। अजरः। महान्। विऽभासि। अर्चिषा। अजस्रेण। शोचिषा। शोशुचत्। शुचे। सुदीतिऽभिः। सु। दीदिहि ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 1 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (शुचे) विद्या और विनय से प्रकाशित (अग्ने) पावक के समान वर्त्तमान ! (हि) जिससे (वृषा) अत्यन्त बलवान् (अजरः) जरा अवस्था से रहित (महान्) बड़े आप (अजस्रेण) निरन्तर (अर्चिषा) सत्कार वा दीप्ति से (शोचिषा) वा प्रकाश से (शोशुचत्) निरन्तर पवित्र करते हुए (सुदीतिभिः) उत्तम दीप्तियों से सबको (विभासि) विशेषता से प्रकाशित करते हैं, इससे हम लोगों को (सु, दीदिहि) प्रकाशित कीजिये ॥३॥
Essence
हे राजन् ! आपको चाहिये कि निरन्तर विद्या और विनय के प्रकाश से और दुष्ट व्यसनों के नाश से प्रजा की निरन्तर पालना करो ॥३॥
Subject
फिर वह राजा क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.