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Rigveda Mandal 6 / Sukta 48 / Mantra 20

75 Sukta
22 Mantra
6/48/20
Devata- मरुतः Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- स्वराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
वा॒मी वा॒मस्य॑ धूतयः॒ प्रणी॑तिरस्तु सू॒नृता॑। दे॒वस्य॑ वा मरुतो॒ मर्त्य॑स्य वेजा॒नस्य॑ प्रयज्यवः ॥२०॥

वा॒मी । वा॒मस्य॑ । धू॒त॒यः॒ । प्रऽनी॑तिः । अ॒स्तु॒ । सू॒नृता॑ । दे॒वस्य॑ । वा॒ । म॒रु॒तः॒ । मर्त्य॑स्य । वे॒जा॒नस्य॑ । प्र॒ऽय॒ज्य॒वः॒ ॥

Mantra without Swara
वामी वामस्य धूतयः प्रणीतिरस्तु सूनृता। देवस्य वा मरुतो मर्त्यस्य वेजानस्य प्रयज्यवः ॥

वामी। वामस्य। धूतयः। प्रऽनीतिः। अस्तु। सूनृता। देवस्य। वा। मरुतः। मर्त्यस्य। वेजानस्य। प्रऽयज्यवः ॥२०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 4 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (धूतयः) कम्पन करानेवाले (प्रयज्यवः) उत्तमता से यज्ञसम्पादको ! तुम में (वामस्य) प्रशंसा करने योग्य का सम्बन्धी (वामी) बहुत प्रशंसित कर्मकर्ता और (देवस्य) विद्वान् की (वा) वा (मरुतः) मरणधर्मा तथा (ईजानस्य) यज्ञकर्त्ता (वा) वा (मर्त्यस्य) साधारण मनुष्य की (सूनृता) सत्यभाषणादि युक्त (प्रणीतिः) उत्तम नीति (अस्तु) हो ॥२०॥
Essence
आप्त राजा मन्त्रियों को उपदेश देवे कि आप लोग न्यायकारी तथा धर्मात्मा होकर पुत्र के समान प्रजाजनों को पालें ॥२०॥
Subject
फिर मनुष्यों को कैसी नीति धारण करनी चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥