Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 48 / Mantra 16

75 Sukta
22 Mantra
6/48/16
Devata- पूषा Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
आ मा॑ पूष॒न्नुप॑ द्रव॒ शंसि॑षं॒ नु ते॑ अपिक॒र्ण आ॑घृणे। अ॒घा अ॒र्यो अरा॑तयः ॥१६॥

आ । मा॒ । पू॒ष॒न् । उप॑ । द्र॒व॒ । शंसि॑षम् । नु । ते॒ । अ॒पि॒ऽक॒र्णे । आ॒घृ॒णे॒ । अ॒घाः । अ॒र्यः । अरा॑तयः ॥

Mantra without Swara
आ मा पूषन्नुप द्रव शंसिषं नु ते अपिकर्ण आघृणे। अघा अर्यो अरातयः ॥

आ। मा। पूषन्। उप। द्रव। शंसिषम्। नु। ते। अपिऽकर्णे। आघृणे। अघाः। अर्यः। अरातयः ॥१६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 3 Mantra » 6

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (पूषन्) पुष्टि करनेवाले (आघृणे) सब ओर से प्रकाशमान ! जिन (ते) आपके (अपिकर्णे) ढंपे हुए कर्ण में मैं (नु) शीघ्र सत्य की (शंसिषम्) प्रशंसा करूँ सो (अर्यः) स्वामी हुए आप (आ) सब ओर से (मा) मेरे (उप, द्रव) समीप आओ और जो (अरातयः) न देनेवाले जन हों उन्हें शीघ्र (अघाः) हनिये अर्थात् मारिये ॥१६॥
Essence
हे पालनीय जन ! आप रक्षा के लिये मेरे समीप आओ, मैं सत्योपदेश से तुम्हें विचक्षण करूँ तथा हम सब लोग मिल के दुष्टों का विनाश करें ॥१६॥
Subject
फिर मनुष्य परस्पर कैसे वर्त्तें, इस विषय को कहते हैं ॥