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Rigveda Mandal 6 / Sukta 48 / Mantra 13

75 Sukta
22 Mantra
6/48/13
Devata- मरुतो लिङ्गोक्ता वा Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृदुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
भ॒रद्वा॑जा॒याव॑ धुक्षत द्वि॒ता। धे॒नुं च॑ वि॒श्वदो॑हस॒मिषं॑ च वि॒श्वभो॑जसम् ॥१३॥

भ॒रत्ऽवा॑जाय । अव॑ । धु॒क्ष॒त॒ । द्वि॒ता । धे॒नुम् । च॒ । वि॒श्वऽदो॑हसम् । इष॑म् । च॒ । वि॒श्वऽभो॑जसम् ॥

Mantra without Swara
भरद्वाजायाव धुक्षत द्विता। धेनुं च विश्वदोहसमिषं च विश्वभोजसम् ॥

भरत्ऽवाजाय। अव। धुक्षत। द्विता। धेनुम्। च। विश्वऽदोहसम्। इषम्। च। विश्वऽभोजसम् ॥१३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 3 Mantra » 3

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Meaning
जो विदुषी माता (भरद्वाजाय) जिसने विज्ञान धारण किया उसके लिये (विश्वदोहसम्) जिससे समस्त विज्ञान को पूर्ण करती उस (धेनुम्) विद्या युक्त वाणी को (अव, धुक्षत) परिपूर्ण करती है और (विश्वभोजसम्) समस्त मनुष्यमात्र के पालक (इषम्) अन्न वा विज्ञान को (च) भी परिपूर्ण करती है वह (द्विता) दोनों विज्ञान वा अन्न की चेष्टावाली (च) भी इस प्रचारिणी क्रिया से होती है ॥१३॥
Essence
जो स्त्रीजन सत्यभाषणयुक्त वाणी और सर्वोत्तम सत्य विद्या को सन्तानों के लिये देती हैं, वे ही देवी विदुषी स्त्रियाँ बहुत मान करने के योग्य होती हैं ॥१३॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

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