Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 47 / Mantra 9

75 Sukta
31 Mantra
6/47/9
Devata- इन्द्र: Rishi- गर्गः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
वरि॑ष्ठे न इन्द्र व॒न्धुरे॑ धा॒ वहि॑ष्ठयोः शताव॒न्नश्व॑यो॒रा। इष॒मा व॑क्षी॒षां वर्षि॑ष्ठां॒ मा न॑स्तारीन्मघव॒न्रायो॑ अ॒र्यः ॥९॥

वरि॑ष्ठे । नः॒ । इ॒न्द्र॒ । व॒न्धुरे॑ । धाः॒ । वहि॑ष्ठयोः । श॒त॒ऽव॒न् । अश्व॑योः । आ । इष॑म् । आ । व॒क्षि॒ । इ॒षाम् । वर्षि॑ष्ठाम् । मा । नः॒ । ता॒री॒त् । म॒घ॒ऽव॒न् । रायः॑ । अ॒र्यः ॥

Mantra without Swara
वरिष्ठे न इन्द्र वन्धुरे धा वहिष्ठयोः शतावन्नश्वयोरा। इषमा वक्षीषां वर्षिष्ठां मा नस्तारीन्मघवन्रायो अर्यः ॥

वरिष्ठे। नः। इन्द्र। वन्धुरे। धाः। वहिष्ठयोः। शतऽवन्। अश्वयोः। आ। इषम्। आ। वक्षि। इषाम्। वर्षिष्ठाम्। मा। नः। तारीत्। मघऽवन्। रायः। अर्यः ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 31 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (शतावन्) सेनाओं से युक्त (मघवन्) बहुत धनवाले (इन्द्र) ऐश्वर्य्यवान् राजन् ! (रायः) धन के (अर्यः) स्वामी आप (वहिष्ठयोः) अतिशय ले चलनेवाले (अश्वयोः) शीघ्र पहुँचानेवालों के (वरिष्ठे) अतिशय श्रेष्ठ (वन्धुरे) प्रेम बन्धन में वाहन से (नः) हम लोगों को (आ, धाः) सब प्रकार से धारण करिये तथा (इषम्) अन्न को (आ, वक्षि) प्राप्त हूजिये और (नः) हम लोगों को (वर्षिष्ठाम्) अतिशय वृद्ध (इषाम्) अन्न आदिकों को (मा) नहीं (तारीत्) अलग करिये ॥९॥
Essence
प्रजा और सेना के जनों को चाहिये कि राजा को ऐसी प्रेरणा करें कि आप हम लोगों को उत्तम वाहनों में उत्तम प्रकार बैठाकर अधिक धन प्राप्त कराइये, जिससे हम लोगों के वञ्चन को कभी मनुष्य न करें अर्थात् हम लोगों को कभी न ठगें ॥९॥
Subject
फिर वह राजा किन के प्रति कैसा वर्त्ताव करे, इस विषय को कहते हैं ॥