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Rigveda Mandal 6 / Sukta 47 / Mantra 7

75 Sukta
31 Mantra
6/47/7
Devata- इन्द्र: Rishi- गर्गः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
इन्द्र॒ प्र णः॑ पुरए॒तेव॑ पश्य॒ प्र नो॑ नय प्रत॒रं वस्यो॒ अच्छ॑। भवा॑ सुपा॒रो अ॑तिपार॒यो नो॒ भवा॒ सुनी॑तिरु॒त वा॒मनी॑तिः ॥७॥

इन्द्र॑ । प्र । नः॒ । पु॒र॒ए॒ताऽइ॑व । पश्य॑ । प्र । नः॒ । न॒य॒ । प्र॒ऽत॒रम् । वस्यः॑ । अच्छ॑ । भव॑ । सु॒ऽपा॒रः । अ॒ति॒ऽपा॒र॒यः । नः॒ । भव॑ । सुऽनी॑तिः । उ॒त । वा॒मऽनी॑तिः ॥

Mantra without Swara
इन्द्र प्र णः पुरएतेव पश्य प्र नो नय प्रतरं वस्यो अच्छ। भवा सुपारो अतिपारयो नो भवा सुनीतिरुत वामनीतिः ॥

इन्द्र। प्र। नः। पुरएताऽइव। पश्य। प्र। नः। नय। प्रऽतरम्। वस्यः। अच्छ। भव। सुऽपारः। अतिऽपारयः। नः। भव। सुऽनीतिः। उत। वामऽनीतिः ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 31 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) दुष्टों के नाश करनेवाले राजन् ! आप (पुरएतेव) आगे चलनेवाले के सदृश (नः) हम लोगों को (प्र, पश्य) अच्छे प्रकार देखिये और (नः) हम लोगों के (प्रतरम्) शत्रुओं के बल के उल्लङ्घन को (अच्छ) अच्छे प्रकार (प्र, नय) प्राप्त करिये और (नः) हम लोगों के शत्रुओं के बल का उल्लङ्घन और (वस्यः) अतिशय धन को अच्छे प्रकार प्राप्त कराइये और हम लोगों का (सुपारः) सुन्दर पार जिनसे ऐसे (अतिपारयः) अत्यन्त पार करनेवाले (भवा) हूजिये तथा (सुनीतिः) अच्छे न्यायवाले और (उत) भी (वामनीतिः) प्रशंसित नीतिवाले (भवा) हूजिये ॥७॥
Essence
जो राजा मनुष्यों की परीक्षा लेनेवाला और सब को न्याय मार्ग से ऐश्वर्य्य को प्राप्त कराने और दुःख और सङ्ग्राम से पार पहुँचानेवाला और सदा धर्मपूर्वक नीतियुक्त होवे, वही इस संसार में प्रशंसा को पावे ॥७॥
Subject
फिर वह राजा कैसा होवे, इस विषय को कहते हैं ॥