Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 47 / Mantra 23

75 Sukta
31 Mantra
6/47/23
Devata- प्रस्तोकस्य सार्ञ्जयस्य दानस्तुतिः Rishi- गर्गः Chhanda- आसुरीपङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
दशाश्वा॒न्दश॒ कोशा॒न्दश॒ वस्त्राधि॑भोजना। दशो॑ हिरण्यपि॒ण्डान्दिवो॑दासादसानिषम् ॥२३॥

दश॑ । अश्वा॑न् । दश॑ । कोशा॑न् । दश॑ । वस्त्रा॑ । अधि॑ऽभोजना । दसो॒ इति॑ । हि॒र॒ण्य॒ऽपि॒ण्डान् । दिवः॑ऽदासात् । अ॒सा॒नि॒ष॒म् ॥

Mantra without Swara
दशाश्वान्दश कोशान्दश वस्त्राधिभोजना। दशो हिरण्यपिण्डान्दिवोदासादसानिषम् ॥

दश। अश्वान्। दश। कोशान्। दश। वस्त्रा। अधिऽभोजना। दशो इति। हिरण्यऽपिण्डान्। दिवःऽदासात्। असानिषम् ॥२३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 34 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे ऐश्वर्य्य से युक्त राजन् ! (दिवोदासात्) सुन्दर धन के देनेवाले आप से (दश) दश सङ्ख्या से युक्त (अश्वान्) घोड़ों और (दश) दश सङ्ख्या से युक्त (कोशान्) दशगुने धन से पूर्ण खजानों और (दश) दश प्रकार के (वस्त्रा) वस्त्रों को और दश प्रकार के (अधिभोजना) अधिक भोजनों को और (दशो) दश प्रकार के (हिरण्यपिण्डान्) सुवर्ण आदि समूहों को मैं (असानिषम्) संविभाग करके प्राप्त होऊँ ॥२३॥
Essence
जो धार्मिक, शूरवीर और शत्रुओं के जीतनेवाले, राजभक्त और प्रजा के पालन में तत्पर विद्वान् मन्त्रीजन होवें, वे घोड़े आदि सम्पूर्ण पदार्थों को दशगुने राजा के समीप से प्राप्त होवें ॥२३॥
Subject
फिर मन्त्रीजन राजा से क्या प्राप्त होवें, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.