Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 47 / Mantra 20

75 Sukta
31 Mantra
6/47/20
Devata- लिङ्गोक्ताः Rishi- गर्गः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒ग॒व्यू॒ति क्षेत्र॒माग॑न्म देवा उ॒र्वी स॒ती भूमि॑रंहूर॒णाभू॑त्। बृह॑स्पते॒ प्र चि॑कित्सा॒ गवि॑ष्टावि॒त्था स॒ते ज॑रि॒त्र इ॑न्द्र॒ पन्था॑म् ॥२०॥

अ॒ग॒व्यू॒ति । क्षेत्र॑म् । आ । अ॒ग॒न्म॒ । दे॒वाः॒ । उ॒र्वी । स॒ती । भूमिः॑ । अं॒हू॒र॒णा । अ॒भू॒त् । बृह॑स्पते । प्र । चि॒कि॒त्स॒ । गोऽइ॑ष्टौ । इ॒त्था । स॒ते । ज॒रि॒त्रे । इ॒न्द्र॒ । पन्था॑म् ॥

Mantra without Swara
अगव्यूति क्षेत्रमागन्म देवा उर्वी सती भूमिरंहूरणाभूत्। बृहस्पते प्र चिकित्सा गविष्टावित्था सते जरित्र इन्द्र पन्थाम् ॥

अगव्यूति। क्षेत्रम्। आ। अगन्म। देवाः। उर्वी। सती। भूमिः। अंहूरणा। अभूत्। बृहस्पते। प्र। चिकित्स। गोऽइष्टौ। इत्था। सते। जरित्रे। इन्द्र। पन्थाम् ॥२०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 33 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (बृहस्पते) बड़ों के पालन करने (चिकित्सा) रोगों की परीक्षा करने और (इन्द्र) रोग और दोषों के दूर करनेवाले वैद्यराज ! आपके सहाय से (उर्वी) बहुत फल आदि से युक्त (सती) वर्त्तमान (अंहूरणा) चलनेवालों का सङ्ग्राम जिसमें वह (भूमिः) पृथिवी (अभूत्) होती है और जहाँ (अगव्यूति) दो कोश के परिमाण से रहित (क्षेत्रम्) निवास करते हैं जिस स्थान में ऐसा स्थान होता है उसको (देवाः) विद्वान् हम लोग (आ, अगन्म) सब प्रकार से प्राप्त होवें (इत्था) इस प्रकार से वा इस हेतु से (गविष्टौ) उत्तम प्रकार शिक्षितवाणी की सङ्गति में (सते) वर्त्तमान (जरित्रे) स्तुति करनेवाले के लिये (पन्थाम्) मार्ग को (प्र) अच्छे प्रकार प्राप्त होवें ॥२०॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो श्रेष्ठ वैद्य होवें उनके साथ मित्रता से रोग रहित, अधिक अवस्थावाले, बलिष्ठ, विद्वान् हो और भूमि के राज्य को प्राप्त होकर जहाँ कहीं विमान आदि वाहनों से जा-आ कर विद्वानों के मार्ग का आश्रयण करो ॥२०॥
Subject
फिर मनुष्य कैसे आरोग्य को प्राप्त होवें, इस विषय को कहते हैं ॥