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Rigveda Mandal 6 / Sukta 46 / Mantra 4

75 Sukta
14 Mantra
6/46/4
Devata- इन्द्रः प्रगाथो वा Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- भुरिग्बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
बाध॑से॒ जना॑न्वृष॒भेव॑ म॒न्युना॒ घृषौ॑ मी॒ळ्ह ऋ॑चीषम। अ॒स्माकं॑ बोध्यवि॒ता म॑हाध॒ने त॒नूष्व॒प्सु सूर्ये॑ ॥४॥

बाध॑से । जना॑न् । वृ॒ष॒भाऽइ॑व । म॒न्युना॑ । घृषौ॑ । मी॒ळ्हे । ऋ॒ची॒ष॒म॒ । अ॒स्माक॑म् । बो॒धि॒ । अ॒वि॒ता । म॒हा॒ऽध॒ने । त॒नूषु॑ । अ॒प्ऽसु । सूर्ये॑ ॥

Mantra without Swara
बाधसे जनान्वृषभेव मन्युना घृषौ मीळ्ह ऋचीषम। अस्माकं बोध्यविता महाधने तनूष्वप्सु सूर्ये ॥

बाधसे। जनान्। वृषभाऽइव। मन्युना। घृषौ। मीळ्हे। ऋचीषम। अस्माकम्। बोधि। अविता। महाऽधने। तनूषु। अप्ऽसु। सूर्ये ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 27 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (ऋचीषम) ऋचा के सदृश प्रशंसा करने योग्य अत्यन्त ऐश्वर्य से युक्त राजन् ! जो (मन्युना) क्रोध से (वृषभेव) बलयुक्त बैल जैसे वैसे (घृषौ) दुष्टों के घर्षण में (मीळ्हे) सङ्ग्राम में (जनान्) मनुष्यों की बाधा करते हैं, जिससे आप उनकी (बाधसे) बाधा करते हो और (अस्माकम्) हम लोगों के (तनूषु) शरीरों में और (अप्सु) प्राणों में (महाधने) सङ्ग्राम में (अविता) रक्षा करनेवाले हुए (सूर्य्ये) सूर्य्य में प्रकाश जैसे वैसे हम लोगों को (बोधि) जनाइये इससे आप आदर करने योग्य हैं ॥४॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे राजन् ! हम लोग दुष्टों के बाधने के लिये और सङ्ग्राम में अपने लोगों की रक्षा के लिये आपका स्वीकार करें तथा आप हम लोगों को सत्य न्यायकृत्य सदा ही जनाइये ॥४॥
Subject
फिर राजा और प्रजाजन किसकी प्रतिज्ञा करें, इस विषय को कहते हैं ॥