Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 46 / Mantra 11

75 Sukta
14 Mantra
6/46/11
Devata- इन्द्रः प्रगाथो वा Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
अध॑ स्मा नो वृ॒धे भ॒वेन्द्र॑ ना॒यम॑वा यु॒धि। यद॒न्तरि॑क्षे प॒तय॑न्ति प॒र्णिनो॑ दि॒द्यव॑स्ति॒ग्ममू॑र्धानः ॥११॥

अध॑ । स्म॒ । नः॒ । वृ॒धे । भ॒व॒ । इन्द्र॑ । न । अ॒यम् । अ॒व॒ । यु॒धि । यत् । अ॒न्तरि॑क्षे । प॒तय॑न्ति । प॒र्णिनः॑ । दि॒द्यवः॑ । ति॒ग्मऽमू॑र्धानः ॥

Mantra without Swara
अध स्मा नो वृधे भवेन्द्र नायमवा युधि। यदन्तरिक्षे पतयन्ति पर्णिनो दिद्यवस्तिग्ममूर्धानः ॥

अध। स्म। नः। वृधे। भव। इन्द्र। नायम्। अव। युधि। यत्। अन्तरिक्षे। पतयन्ति। पर्णिनः। दिद्यवः। तिग्मऽमूर्धानः ॥११॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 29 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) ऐश्वर्य्य के बढ़ानेवाले सेना के स्वामी ! (यत्) जो (अन्तरिक्षे) अन्तरिक्ष में (पर्णिनः) पक्षियों के समान (दिद्यवः) प्रकाशमान (तिग्ममूर्द्धानः) ऊपर वर्त्तमान योद्धा जन (युधि) सङ्ग्राम में (पतयन्ति) जाते हैं (अध) इसके अनन्तर विजय को (नायम्) प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं उनके साथ (नः) हम लोगों की (वृधे) वृद्धि के लिये (भव) प्रसिद्ध हूजिये और सङ्ग्राम में हम लोगों की (स्मा) ही निरन्तर (अवा) रक्षा कीजिये ॥११॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे राजन् ! आप विमान आदि वाहनों को स्थापित कर पक्षियों के सदृश अन्तरिक्ष मार्ग से गमन और आगमन करके तथा उत्तम पुरुषों के साथ विजय को प्राप्त होकर सब से श्रेष्ठ हूजिये ॥११॥
Subject
फिर वह राजा क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥