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Rigveda Mandal 6 / Sukta 45 / Mantra 30

75 Sukta
33 Mantra
6/45/30
Devata- इन्द्र: Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒स्माक॑मिन्द्र भूतु ते॒ स्तोमो॒ वाहि॑ष्ठो॒ अन्त॑मः। अ॒स्मान्रा॒ये म॒हे हि॑नु ॥३०॥

अ॒स्माक॑म् । इ॒न्द्र॒ । भू॒तु॒ । ते॒ । स्तोमः॑ । वाहि॑ष्ठः । अन्त॑मः । अ॒स्मान् । रा॒ये । म॒हे । हि॒नु॒ ॥

Mantra without Swara
अस्माकमिन्द्र भूतु ते स्तोमो वाहिष्ठो अन्तमः। अस्मान्राये महे हिनु ॥

अस्माकम्। इन्द्र। भूतु। ते। स्तोमः। वाहिष्ठः। अन्तमः। अस्मान्। राये। महे। हिनु ॥३०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 26 Mantra » 5

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Meaning
हे (इन्द्र) धन के देनेवाले ! (अस्माकम्) हम लोगों का (वाहिष्ठः) अतिशय धारण करनेवाला (अन्तमः) समीप में वर्त्तमान (स्तोमः) प्रशंसास्वरूप व्यवहार (ते) आपका बढ़ानेवाला (भूतु) होवे और जो आपके समीप में वर्त्तमान अतिशय धारण करनेवाला प्रशंसारूप व्यवहार हो वह (अस्मान्) हम लोगों को (महे) बड़े (राये) धन के लिये (हिनु) बढ़ावे ॥३०॥
Essence
हे राजन् ! जो ऐश्वर्य्य आपका वह प्रजा का, और जो प्रजा का वह आपका हो ऐसा करने के विना राजा और प्रजा की उन्नति का नहीं सम्भव है ॥३०॥
Subject
राजा और प्रजाजन एकमति करें, इस विषय को कहते हैं ॥

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