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Rigveda Mandal 6 / Sukta 45 / Mantra 25

75 Sukta
33 Mantra
6/45/25
Devata- इन्द्र: Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ॒मा उ॑ त्वा शतक्रतो॒ऽभि प्र णो॑नुवु॒र्गिरः॑। इन्द्र॑ व॒त्सं न मा॒तरः॑ ॥२५॥

इ॒माः । ऊँ॒ इति॑ । त्वा॒ । श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शतऽक्रतो । अ॒भि । प्र । नो॒नु॒वुः॒ । गिरः॑ । इन्द्र॑ । व॒त्सम् । न । मा॒तरः॑ ॥

Mantra without Swara
इमा उ त्वा शतक्रतोऽभि प्र णोनुवुर्गिरः। इन्द्र वत्सं न मातरः ॥

इमाः। ऊँ इति। त्वा। शतक्रतो इति शतऽक्रतो। अभि। प्र। नोनुवुः। गिरः। इन्द्र। वत्सम्। न। मातरः ॥२५॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 25 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (शतक्रतो) अथाह बुद्धिवाले (इन्द्र) प्रजाओं के पालन में तत्पर ! (वत्सम्) बछड़े को (मातरः) आदर देनेवाली माता (न) जैसे वैसे जो (इमाः) ये प्रजायें और (गिरः) वाणियाँ (त्वा) आपकी (प्र, नोनुवुः) अत्यन्त प्रशंसा करें उनकी (उ) वितर्क के साथ आप (अभि) सब प्रकार से स्तुति करिये ॥२५॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे राजन् ! जैसे गौवें प्रेम से अपने बछड़ों को प्रसन्न करती हैं, वैसे ही उत्तम प्रकार शिक्षित वाणियाँ सब को आनन्द देती हैं, ऐसा जानो ॥२५॥
Subject
फिर धर्म्मात्मा राजा की सब प्रशंसा करें, इस विषय को कहते हैं ॥