Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 45 / Mantra 20

75 Sukta
33 Mantra
6/45/20
Devata- इन्द्र: Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स हि विश्वा॑नि॒ पार्थि॑वाँ॒ एको॒ वसू॑नि॒ पत्य॑ते। गिर्व॑णस्तमो॒ अध्रि॑गुः ॥२०॥

सः । हि । विश्वा॑नि । पार्थि॑वा । एकः॑ । वसू॑नि । पत्य॑ते । गिर्व॑णःऽतमः । अध्रि॑ऽगुः ॥

Mantra without Swara
स हि विश्वानि पार्थिवाँ एको वसूनि पत्यते। गिर्वणस्तमो अध्रिगुः ॥

सः। हि। विश्वानि। पार्थिवा। एकः। वसूनि। पत्यते। गिर्वणःऽतमः। अध्रिऽगुः ॥२०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 24 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (सः) वह (हि) जिससे (एकः) सहायरहित (गिर्वणस्तमः) अतिशयित वाणियों से प्रशंसा करने योग्य (अध्रिगुः) सत्यगमनवाला राजा (विश्वानि) समस्त (पार्थिवा) पृथिवी में जाने हुए (वसूनि) द्रव्यों को (पत्यते) स्वामी के सदृश आचरण करता है, इससे हम लोगों से सत्कार करने योग्य है ॥२०॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो विलक्षण बुद्धि और विद्या से युक्त, पृथिवी आदि पदार्थों की विद्या का जाननेवाला, प्रशंसा करने योग्य गुण, कर्म, और स्वभावयुक्त और सत्य आचरण करनेवाला जन होवे, उसी को राजा करो ॥२०॥
Subject
फिर मनुष्यों को कैसा राजा करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥