Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 44 / Mantra 9

75 Sukta
24 Mantra
6/44/9
Devata- इन्द्र: Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
द्यु॒मत्त॑मं॒ दक्षं॑ धेह्य॒स्मे सेधा॒ जना॑नां पू॒र्वीररा॑तीः। वर्षी॑यो॒ वयः॑ कृणुहि॒ शची॑भि॒र्धन॑स्य सा॒ताव॒स्माँ अ॑विड्ढि ॥९॥

द्यु॒मत्ऽत॑मम् । दक्ष॑म् । धे॒हि॒ । अ॒स्मे इति॑ । सेध॑ । जना॑नाम् । पू॒र्वीः । अरा॑तीः । वर्षी॑यः । वयः॑ । कृ॒णु॒हि॒ । शची॑भिः । धन॑स्य । सा॒तौ । अ॒स्मान् । अ॒वि॒ड्ढि॒ ॥

Mantra without Swara
द्युमत्तमं दक्षं धेह्यस्मे सेधा जनानां पूर्वीररातीः। वर्षीयो वयः कृणुहि शचीभिर्धनस्य सातावस्माँ अविड्ढि ॥

द्युमत्ऽतमम्। दक्षम्। धेहि। अस्मे इति। सेध। जनानाम्। पूर्वीः। अरातीः। वर्षीयः। वयः। कृणुहि। शचीभिः। धनस्य। सातौ। अस्मान्। अविड्ढि ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 17 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! आप (शचीभिः) बुद्धियों वा कर्मों वा प्रजाओं के साथ (अस्मे) हम लोगों में (द्युमत्तमम्) प्रशंसित अत्यन्त विद्या के प्रकाश से युक्त (दक्षम्) बल को (धेहि) धारण करिये और कार्य्य को (सेधा) सिद्ध कीजिये और (जनानाम्) मनुष्यों की (पूर्वीः) प्राचीन (अरातीः) नहीं दान करने की क्रियाओं को दूर कीजिये तथा (वर्षीयः) अतिशय श्रेष्ठ (वयः) सुन्दर अवस्था को (कृणुहि) करिये और (धनस्य) धन के (सातौ) संविभाग में (अस्मान्) हम लोगों का (अविड्ढि) प्रवेश कराइये ॥९॥
Essence
प्रजाजनों को राजा की ऐसी प्रार्थना करनी चाहिये कि हे राजन् ! आप जो हम लोगों को बलयुक्त, कृपणता से रहित और ब्रह्मचर्य्य आदि से दीर्घ अवस्थावाले पुरुषार्थी और सब प्रकार से रक्षा करके भयरहित करके धर्म्म, अर्थ, काम और मोक्ष के साधन में प्रवेश कराइये तो आपकी हम लोग सर्वदा वृद्धि करें ॥९॥
Subject
अब राजा और प्रजाजन का हित कैसे करें, इस विषय को कहते हैं ॥