Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 44 / Mantra 18

75 Sukta
24 Mantra
6/44/18
Devata- इन्द्र: Rishi- शंयुर्बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ॒सु ष्मा॑ णो मघवन्निन्द्र पृ॒त्स्व१॒॑स्मभ्यं॒ महि॒ वरि॑वः सु॒गं कः॑। अ॒पां तो॒कस्य॒ तन॑यस्य जे॒ष इन्द्र॑ सू॒रीन्कृ॑णु॒हि स्मा॑ नो अ॒र्धम् ॥१८॥

आ॒सु । स्म॒ । नः॒ । म॒घ॒ऽव॒न् । इ॒न्द्र॒ । पृ॒त्ऽसु । अ॒स्मभ्य॑म् । महि॑ । वरि॑वः । सु॒ऽगम् । क॒रिति॑ कः । अ॒पाम् । तो॒कस्य॑ । तन॑यस्य । जे॒षे । इन्द्र॑ । सू॒रीन् । कृ॒णु॒हि । स्म॒ । नः॒ । अ॒र्धम् ॥

Mantra without Swara
आसु ष्मा णो मघवन्निन्द्र पृत्स्व१स्मभ्यं महि वरिवः सुगं कः। अपां तोकस्य तनयस्य जेष इन्द्र सूरीन्कृणुहि स्मा नो अर्धम् ॥

आसु। स्म। नः। मघऽवन्। इन्द्र। पृत्ऽसु। अस्मभ्यम्। महि। वरिवः। सुऽगम्। करिति कः। अपाम्। तोकस्य। तनयस्य। जेषे। इन्द्र। सूरीन्। कृणुहि। स्म। नः। अर्धम् ॥१८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 19 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (मघवन्) बहुत धन से युक्त (इन्द्र) दुष्टों के मारनेवाले ! आप (आसु) इन (पृत्सु) वीर मनुष्यों की सेनाओं में (अस्मभ्यम्) हम लोगों के लिये (महि) बड़े (सुगम्) उत्तम प्रकार चलते हैं जिसमें उस (वरिवः) सेवन को (कः) करें (नः) हम लोगों को (स्मा) ही विजयी करें ओर हे (इन्द्र) सम्पूर्ण ऐश्वर्य्यों के देनेवाले ! आप (अपाम्) प्राणों के (तोकस्य) शीघ्र उत्पन्न हुए अपत्य के और (तनयस्य) सुकुमार के बोध के लिये और शत्रुओं को (जेषे) जीतने के लिये (नः) हम लोगों को (सूरीन्) युद्धविद्या में कुशल विद्वान् और (अर्धम्) अच्छे प्रकार समृद्धि को (स्मा) ही (कृणुहि) करिये ॥१८॥
Essence
राजा वैसा यत्न करे जैसे अपनी सेनायें उत्तम प्रकार शिक्षित, जीतनेवाली और बलयुक्त होवें और सम्पूर्ण बालक और कन्यायें ब्रह्मचर्य्य से विद्यायुक्त होकर समृद्धि को प्राप्त हुए सत्य, न्याय और धर्म का निरन्तर सेवन करें ॥१८॥
Subject
फिर राजा और प्रजाजनों को निरन्तर क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.