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Rigveda Mandal 6 / Sukta 42 / Mantra 2

75 Sukta
4 Mantra
6/42/2
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
एमे॑नं प्र॒त्येत॑न॒ सोमे॑भिः सोम॒पात॑मम्। अम॑त्रेभिर्ऋजी॒षिण॒मिन्द्रं॑ सु॒तेभि॒रिन्दु॑भिः ॥२॥

आ । ई॒म् । ए॒न॒म् । प्र॒ति॒ऽएत॑न । सोमे॑भिः । सो॒म॒ऽपात॑नम् । अम॑त्रेभिः । ऋजी॒षिण॑म् । इन्द्र॑म् । सु॒तेभिः॑ । इन्दु॑ऽभिः ॥

Mantra without Swara
एमेनं प्रत्येतन सोमेभिः सोमपातमम्। अमत्रेभिर्ऋजीषिणमिन्द्रं सुतेभिरिन्दुभिः ॥

आ। ईम्। एनम्। प्रतिऽएतन। सोमेभिः। सोमऽपातनम्। अमत्रेभिः। ऋजीषिणम्। इन्द्रम्। सुतेभिः। इन्दुऽभिः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 14 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! आप लोग (सुतेभिः) उत्पन्न किये गये (सोमेभिः) ऐश्वर्य्यों वा ओषधियों के समूहों से (इन्दुभिः) आनन्दकारक जलों से तथा (अमत्रेभिः) उत्तम पात्रों से (सोमपातमम्) अतिशय सोमरस के पीनेवाले (ऋजीषिणम्) सरल धार्मिक जनों की इच्छा करने के स्वभाववाले (एनम्) इस (इन्द्रम्) ऐश्वर्य्य के देनेवाले राजा की (ईम्) सब ओर से (प्रत्येतन) प्रतीति करिये ॥२॥
Essence
हे राजा और प्रजाजनो ! आप लोग यथार्थवक्ता तथा राजा आदि विद्वानों में विश्वास करिये और वे आप लोगों में विश्वास करें, इस प्रकार दोनों और आनन्द बढ़े ॥२॥
Subject
फिर मनुष्य क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥