Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 41 / Mantra 3

75 Sukta
5 Mantra
6/41/3
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ए॒ष द्र॒प्सो वृ॑ष॒भो वि॒श्वरू॑प॒ इन्द्रा॑य॒ वृष्णे॒ सम॑कारि॒ सोमः॑। ए॒तं पि॑ब हरिवः स्थातरुग्र॒ यस्येशि॑षे प्र॒दिवि॒ यस्ते॒ अन्न॑म् ॥३॥

ए॒षः । द्र॒प्सः । वृ॒ष॒भः । वि॒श्वऽरू॑पः । इन्द्रा॑य । वृष्णे॑ । सम् । अ॒का॒रि॒ । सोमः॑ । ए॒तम् । पि॒ब॒ । ह॒रि॒ऽवः॒ । स्था॒तः॒ । उ॒ग्र॒ । यस्य॑ । ईशि॑षे । प्र॒ऽदिवि॑ । यः । ते॒ । अन्न॑म् ॥

Mantra without Swara
एष द्रप्सो वृषभो विश्वरूप इन्द्राय वृष्णे समकारि सोमः। एतं पिब हरिवः स्थातरुग्र यस्येशिषे प्रदिवि यस्ते अन्नम् ॥

एषः। द्रप्सः। वृषभः। विश्वऽरूपः। इन्द्राय। वृष्णे। सम्। अकारि। सोमः। एतम्। पिब। हरिऽवः। स्थातः। उग्र। यस्य। ईशिषे। प्रऽदिवि। यः। ते। अन्नम् ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 13 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (हरिवः) अच्छे मनुष्यों से युक्त (स्थातः) स्थित होनेवाले (उग्र) तेजस्विन् राजन् ! (यस्य) जिस (ते) आपका (एषः) यह (द्रप्सः) दुष्टों का विमोह करना (वृषभः) सुख का वर्षानेवाला (विश्वरूपः) अनेक प्रकार के स्वरूपवाला (सोमः) बड़ी-बड़ी ओषधियों से उत्पन्न हुआ रस (वृष्णे) बल आदि गुण के करने और (इन्द्राय) अत्यन्त ऐश्वर्य्य को प्राप्त करानेवाले के लिये (सम्, अकारि) किया जाता है (यः) जो (प्रदिवि) अच्छे प्रकार सुन्दर व्यवहार में (अन्नम्) भोजन करने योग्य पदार्थ को प्राप्त कराता (एतम्) इस का आप (पिब) पान करिये और इसके (ईशिषे) स्वामी हूजिये ॥३॥
Essence
जिस राजा के अनेक प्रकार के उत्तम प्रबन्ध, उत्तम ओषधियाँ, उत्तम सेना और धार्मिक विद्वान् अधिकारी हैं, वही सम्पूर्ण प्रतिष्ठा को प्राप्त होता है ॥३॥
Subject
फिर वे क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥