Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 41 / Mantra 2

75 Sukta
5 Mantra
6/41/2
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
या ते॑ का॒कुत्सुकृ॑ता॒ या वरि॑ष्ठा॒ यया॒ शश्व॒त्पिब॑सि॒ मध्व॑ ऊ॒र्मिम्। तया॑ पाहि॒ प्र ते॑ अध्व॒र्युर॑स्था॒त्सं ते॒ वज्रो॑ वर्ततामिन्द्र ग॒व्युः ॥२॥

या । ते॒ । का॒कुत् । सुऽकृ॑ता । या । वरि॑ष्ठा । यया॑ । शश्व॑त् । पिब॑सि । मध्वः॑ । ऊ॒र्मिम् । तया॑ । पा॒हि॒ । प्र । ते॒ । अ॒ध्व॒र्युः । अ॒स्था॒त् । सम् । ते॒ । वज्रः॑ । व॒र्त॒ता॒म् । इ॒न्द्र॒ । ग॒व्युः ॥

Mantra without Swara
या ते काकुत्सुकृता या वरिष्ठा यया शश्वत्पिबसि मध्व ऊर्मिम्। तया पाहि प्र ते अध्वर्युरस्थात्सं ते वज्रो वर्ततामिन्द्र गव्युः ॥

या। ते। काकुत्। सुऽकृता। या। वरिष्ठा। यया। शश्वत्। पिबसि। मध्वः। ऊर्मिम्। तया। पाहि। प्र। ते। अध्वर्युः। अस्थात्। सम्। ते। वज्रः। वर्तताम्। इन्द्र। गव्युः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 13 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) धर्म्म के धारण करनेवाले मनुष्यों के स्वामिन् ! (ते) आपकी (या) जो (सुकृता) सत्य भाषण आदि उत्तम किया से युक्त और (या) जो (वरिष्ठा) अतिशय उत्तम (काकुत्) उत्तम प्रकार शिक्षा की गई वाणी (यया) जिससे आप (ऊर्मिम्) तरंग को जैसे वैसे (मध्वः) मधुर आदि गुणों से युक्त के रस को (शश्वत्) निरन्तर (पिबसि) पान करते हो और जिससे (ते) आपका (अध्वर्युः) अपने अहिंसारूप व्यवहार की कामना करते हुए अच्छे प्रकार से (प्र, अस्थात्) स्थित होते हो और जिससे (ते) आपका (वज्रः) शस्त्र और अस्त्रों का समूह (सम्, वर्त्तताम्) उत्तम प्रकार वर्त्तमान होवे (तया) उससे (गव्युः) पृथिवी राज्य की इच्छा करनेवाले हुए सम्पूर्ण प्रजाओं का (पाहि) पालन करिये ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। राजा और राजा के सभासद् उत्तम प्रकार संस्कार की विद्या से युक्त, सत्यभाषण से उज्ज्वलित वाणियों को प्राप्त होकर उनसे प्रजापालन आदि व्यवहारों को निरन्तर सिद्ध करें ॥२॥
Subject
फिर वे क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥