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Rigveda Mandal 6 / Sukta 4 / Mantra 8

75 Sukta
8 Mantra
6/4/8
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
नू नो॑ अग्नेऽवृ॒केभिः॑ स्व॒स्ति वेषि॑ रा॒यः प॒थिभिः॒ पर्ष्यंहः॑। ता सू॒रिभ्यो॑ गृण॒ते रा॑सि सु॒म्नं मदे॑म श॒तहि॑माः सु॒वीराः॑ ॥८॥

नु । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । अ॒वृ॒केभिः॑ । स्व॒स्ति । वेषि॑ । रा॒यः । प॒थिऽभिः । पर्षि॑ । अंहः॑ । ता । सूरिऽभ्यः॑ । गृ॒ण॒ते । रा॒सि॒ । सु॒म्नम् । मदे॑म । श॒तऽहि॑माः । सु॒ऽवीराः॑ ॥

Mantra without Swara
नू नो अग्नेऽवृकेभिः स्वस्ति वेषि रायः पथिभिः पर्ष्यंहः। ता सूरिभ्यो गृणते रासि सुम्नं मदेम शतहिमाः सुवीराः ॥

नु। नः। अग्ने। अवृकेभिः। स्वस्ति। वेषि। रायः। पथिऽभिः। पर्षि। अंहः। ता। सूरिऽभ्यः। गृणते। रासि। सुम्नम्। मदेम। शतऽहिमाः। सुऽवीराः ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 6 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वन् ! जो आप (अवृकेभिः) चोरों से भिन्न जनों के साथ (नः) हम लोगों को (स्वस्ति) सुख (वेषि) व्याप्त करते हो तथा (पथिभिः) उत्तम मार्गों से (रायः) धनों को (नू) शीघ्र (पर्षि) पालन करते हो और (सूरिभ्यः) विद्वानों के लिये और (गृणते) स्तुति करते हुए के लिये (सुम्नम्) सुख को (रासि) देते हो तथा (अंहः) अपराध को दूर करते हो उन आपके साथ (ता) उक्त पदार्थों को प्राप्त होकर (शतहिमाः) सौ वर्ष पर्य्यन्त (सुवीराः) श्रेष्ठ वीर हम लोग (मदेम) आनन्द करें ॥८॥
Essence
हे मनुष्यो ! चोरी और चोर के सङ्ग और अन्याय से पाप के आचरण का त्याग करके सुख को प्राप्त होकर सौ वर्ष युक्त होओ ॥८॥ इस सूक्त में अग्नि, ईश्वर और विद्वान् के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इससे पूर्व सूक्त के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह चौथा सूक्त और छठा वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
अब विद्वानों के गुणों को कहते हैं ॥