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Rigveda Mandal 6 / Sukta 36 / Mantra 1

75 Sukta
5 Mantra
6/36/1
Devata- इन्द्र: Rishi- नरः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स॒त्रा मदा॑स॒स्तव॑ वि॒श्वज॑न्याः स॒त्रा रायोऽध॒ ये पार्थि॑वासः। स॒त्रा वाजा॑नामभवो विभ॒क्ता यद्दे॒वेषु॑ धा॒रय॑था असु॒र्य॑म् ॥१॥

स॒त्रा । मदा॑सः । तव॑ । वि॒श्वऽज॑न्याः । स॒त्रा । रायः॑ । अध॑ । ये । पार्थि॑वासः । स॒त्रा । वाजा॑नाम् । अ॒भ॒वः॒ । वि॒ऽभ॒क्ता । यत् । दे॒वेषु॑ । धा॒रय॑थाः । असु॒र्य॑म् ॥

Mantra without Swara
सत्रा मदासस्तव विश्वजन्याः सत्रा रायोऽध ये पार्थिवासः। सत्रा वाजानामभवो विभक्ता यद्देवेषु धारयथा असुर्यम् ॥

सत्रा। मदासः। तव। विश्वऽजन्याः। सत्रा। रायः। अध। ये। पार्थिवासः। सत्रा। वाजानाम्। अभवः। विऽभक्ता। यत्। देवेषु। धारयथाः। असुर्यम् ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 8 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! (तव) आपके (ये) जो (विश्वजन्याः) सम्पूर्ण जन्य सुख जिनमें वे (सत्रा) सत्य (मदासः) आनन्द देनेवाले और (सत्रा) सत्य (रायः) धन (सत्रा) सत्य (पार्थिवासः) पृथिवी में विदित और (वाजानाम्) अन्न आदिकों के सत्य (विभक्ता) विभागों को प्राप्त हुए हैं उनके आप धारण करनेवाले (अभवः) हूजिये (अध) इसके अनन्तर (यत्) जो (देवेषु) विद्वानों में (असुर्यम्) अविद्वानों में हुआ है, उसको (धारयथाः) धारण कराइये ॥१॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो इस संसार में बुद्धि और आनन्द के बढ़ानेवाले, विद्या और धनादि से युक्त और विद्वानों के साथ सत्सङ्ग करनेवाले हैं, उनको धारण करके सत्य और असत्य के विभाग करनेवाले हूजिये ॥१॥
Subject
अब पाँच ऋचावाले छत्तीसवें सूक्त का प्रारम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में राजा कैसा होकर क्या धारण करे, इस विषय को कहते हैं ॥