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Rigveda Mandal 6 / Sukta 3 / Mantra 8

75 Sukta
8 Mantra
6/3/8
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
धायो॑भिर्वा॒ यो युज्ये॑भिर॒र्कैर्वि॒द्युन्न द॑विद्यो॒त्स्वेभिः॒ शुष्मैः॑। शर्धो॑ वा॒ यो म॒रुतां॑ त॒तक्ष॑ ऋ॒भुर्न त्वे॒षो र॑भसा॒नो अ॑द्यौत् ॥८॥

धायः॑ऽभिः । वा॒ । यः । युज्ये॑भिः । अ॒र्कैः । वि॒द्युत् । न । द॒वि॒द्यो॒त् । स्वेभिः॑ । शुष्मैः॑ । शर्धः॑ । वा॒ । यः । म॒रुता॑म् । त॒तक्ष॑ । ऋ॒भुः । न । त्वे॒षः । र॒भ॒सा॒नः । अ॒द्यौ॒त् ॥

Mantra without Swara
धायोभिर्वा यो युज्येभिरर्कैर्विद्युन्न दविद्योत्स्वेभिः शुष्मैः। शर्धो वा यो मरुतां ततक्ष ऋभुर्न त्वेषो रभसानो अद्यौत् ॥

धायःऽभिः। वा। यः। युज्येभिः। अर्कैः। विद्युत्। न। दविद्योत्। स्वेभिः। शुष्मैः। शर्धः। वा। यः। मरुताम्। ततक्ष। ऋभुः। न। त्वेषः। रभसानः। अद्यौत् ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 4 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! (यः) जो (धायोभिः) धारण करनेवालों वा गुणों से और (युज्येभिः) युक्त करने योग्य (स्वेभिः) अपने (शुष्मैः) बलों और गुणों से (वा) वा (विद्युत्) बिजुली (न) जैसे वैसे (स्वेभिः) अपने (अर्कैः) सत्कारों योग्य कारणों से (दविद्योत्) प्रकाशित होता है (यः) जो (वा) वा (मरुताम्) मनुष्यों के (शर्धः) बल को (ऋभुः) बुद्धिमान् जन (न) जैसे वैसे (ततक्ष) तीक्ष्ण करता है तथा (त्वेषः) प्रकाशयुक्त और (रभसानः) वेगयुक्त जैसे (अद्यौत्) प्रकाशित होता है, वही राजा संस्थापित करने योग्य है ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे मनुष्यो ! जो बिजुली के सदृश प्रतापी, बलवान्, पदार्थों के संयोग और वियोग की विद्या में चतुर, बुद्धिमान्, विद्वान्, धर्मात्मा, इन्द्रियों को जीतनेवाला और प्रजापालनप्रिय क्षत्रिय होवे, वही राजा होने के योग्य होवे ॥८॥ इस सूक्त में अग्नि और विद्वान् के गुणवर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इससे पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह तीसरा सूक्त और चौथा वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
अब कैसा मनुष्य राजा होने के योग्य है, इस विषय को कहते हैं ॥