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Rigveda Mandal 6 / Sukta 29 / Mantra 2

75 Sukta
6 Mantra
6/29/2
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ यस्मि॒न्हस्ते॒ नर्या॑ मिमि॒क्षुरा रथे॑ हिर॒ण्यये॑ रथे॒ष्ठाः। आ र॒श्मयो॒ गभ॑स्त्योः स्थू॒रयो॒राध्व॒न्नश्वा॑सो॒ वृष॑णो युजा॒नाः ॥२॥

आ । यस्मि॑न् । हस्ते॑ । नर्याः॑ । मि॒मि॒क्षुः । आ । रथे॑ । हि॒र॒ण्यये॑ । र॒थे॒ऽस्थाः । आ । र॒श्मयः॑ । गभ॑स्त्योः । स्थू॒रयोः॑ । आ । अध्व॑न् । अश्वा॑सः । वृष॑णः । यु॒जा॒नाः ॥

Mantra without Swara
आ यस्मिन्हस्ते नर्या मिमिक्षुरा रथे हिरण्यये रथेष्ठाः। आ रश्मयो गभस्त्योः स्थूरयोराध्वन्नश्वासो वृषणो युजानाः ॥

आ। यस्मिन्। हस्ते। नर्याः। मिमिक्षुः। आ। रथे। हिरण्यये। रथेऽस्थाः। आ। रश्मयः। गभस्त्योः। स्थूरयोः। आ। अध्वन्। अश्वासः। वृषणः। युजानाः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 7 Varga » 1 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! ऐश्वर्य करनेवाले के (यस्मिन्) जिस (हस्ते) हस्त में (रश्मयः) किरणों के समान (आ) सब ओर से (मिमिक्षुः) सिञ्चन करते सम्बन्ध करते हैं तथा (नर्याः) मनुष्यों के लिये हितकारक शस्त्र और अस्त्र जिसके (हिरण्यये) तेज के विकार से बने हुए (रथे) रथ में और (रथेष्ठाः) रथ पर स्थित होनेवाले जन और (स्थूरयोः) स्थूल (गभस्त्योः) बाहुओं के मध्य में शस्त्र और अस्त्र हैं तथा जिसके वाहनों में (वृषणः) बलिष्ठ (अश्वासः) घोड़ों के समान बड़े बिजुली आदि पदार्थ (आ) सब ओर से (युजानाः) युक्त (अध्वन्) मार्ग में यानों को (आ) लाते हैं, वे सुखों से जनों का (आ) अच्छे प्रकार सम्बन्ध करते हैं ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो राजा शस्त्र और अस्त्र के जाननेवाले, श्रेष्ठ धार्मिक, शूर तथा विमान आदि वाहनों के बनानेवाले शिल्पियों और बिजुली आदि की विद्या को जाननेवाले विद्वानों का सत्कार करके रक्षा करता है, उसी के सूर्य के किरणों के समान यश बढ़ते हैं ॥२॥
Subject
फिर वह राजा क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥