Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 28 / Mantra 7

75 Sukta
8 Mantra
6/28/7
Devata- गावः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
प्र॒जाव॑तीः सू॒यव॑सं रि॒शन्तीः॑ शु॒द्धा अ॒पः सु॑प्रपा॒णे पिब॑न्तीः। मा वः॑ स्ते॒न ई॑शत॒ माघशं॑सः॒ परि॑ वो हे॒ती रु॒द्रस्य॑ वृज्याः ॥७॥

प्र॒जाऽव॑तीः । सु॒ऽयव॑सम् । रि॒शन्तीः॑ । शु॒द्धाः । अ॒पः । सु॒ऽप्र॒पा॒ने । पिब॑न्तीः । मा । वः॒ । स्ते॒नः । ई॒श॒त॒ । मा । अ॒घऽशं॑सः । परि॑ । वः॒ । हे॒तिः । रु॒द्रस्य॑ । वृ॒ज्याः॒ ॥

Mantra without Swara
प्रजावतीः सूयवसं रिशन्तीः शुद्धा अपः सुप्रपाणे पिबन्तीः। मा वः स्तेन ईशत माघशंसः परि वो हेती रुद्रस्य वृज्याः ॥

प्रजाऽवतीः। सुऽयवसम्। रिशन्तीः। शुद्धाः। अपः। सुऽप्रपाने। पिबन्तीः। मा। वः। स्तेनः। ईशत। मा। अघऽशंसः। परि। वः। हेतिः। रुद्रस्य। वृज्याः ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 25 Mantra » 7

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे राजन् ! जैसे गौवों का पालन करनेवाला (सूयवसम्) सुन्दर घास आदि को (रिशन्तीः) भक्षण करती हुई (सुप्रपाणे) सुन्दर जलपान के स्थान में (शुद्धाः) निर्मल (अपः) जलों को (पिबन्तीः) पीती हुई (प्रजावतीः) श्रेष्ठ सन्तानवाली गौवों का पालन करता है, वैसे आप प्रजाओं का पालन करिये और जैसे (वः) आप लोगों की प्रजाओं को (स्तेनः) चोर और (अघशंसः) पाप करनेवाला डाकू (मा) नहीं (ईशत) मारने में समर्थ होवे, वैसे (वः) आप लोगों के सम्बन्ध में (रुद्रस्य) रौद्र कर्म के करनेवाले का (हेतिः) वज्र इनको (मा) मत (परि, वृज्याः) परिवर्जन करे ॥७॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो पिता के सदृश प्रजाओं का पालन करते और शुद्ध भोजन और विहारवाली करके पुरुषार्थ करते और चोर आदि दुष्टों का छेदन करते हैं, वे राजा, अमात्य और भृत्य प्रशंसा करने योग्य होते हैं ॥७॥
Subject
अब प्रजाओं का कैसे पालन करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.