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Rigveda Mandal 6 / Sukta 28 / Mantra 1

75 Sukta
8 Mantra
6/28/1
Devata- गावः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ गावो॑ अग्मन्नु॒त भ॒द्रम॑क्र॒न्त्सीद॑न्तु गो॒ष्ठे र॒णय॑न्त्व॒स्मे। प्र॒जाव॑तीः पुरु॒रूपा॑ इ॒ह स्यु॒रिन्द्रा॑य पू॒र्वीरु॒षसो॒ दुहा॑नाः ॥१॥

आ । गावः॑ । अ॒ग्म॒न् । उ॒त । भ॒द्रम् । अ॒क्र॒न् । सीद॑न्तु । गो॒ऽस्थे । र॒णय॑न्तु । अ॒स्मे इति॑ । प्र॒जाऽव॑तीः । पु॒रु॒ऽरूपाः॑ । इ॒ह । स्युः॒ । इन्द्रा॑य । पू॒र्वीः । उ॒षसः॑ । दुहा॑नाः ॥

Mantra without Swara
आ गावो अग्मन्नुत भद्रमक्रन्त्सीदन्तु गोष्ठे रणयन्त्वस्मे। प्रजावतीः पुरुरूपा इह स्युरिन्द्राय पूर्वीरुषसो दुहानाः ॥

आ। गावः। अग्मन्। उत। भद्रम्। अक्रन्। सीदन्तु। गोऽस्थे। रणयन्तु। अस्मे इति। प्रजाऽवतीः। पुरुऽरूपाः। इह। स्युः। इन्द्राय। पूर्वीः। उषसः। दुहानाः ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 25 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (इह) यहाँ (अस्मे) हम लोगों के लिये (गावः) किरणें (आ, अग्मन्) प्राप्त होती हैं (उत) और (रणयन्तु) शब्द करावें तथा (भद्रम्) कल्याण को (अक्रन्) करती हैं, वे (गोष्ठे) गौओं के बैठने के स्थान में (सीदन्तु) प्राप्त हों और जैसे (पुरुरूपाः) बहुत रूपवाली (पूर्वीः) प्राचीन (दुहानाः) मनोरथ को पूर्ण करती हुई (उषसः) प्रभात वेलाएँ (इन्द्राय) अत्यन्त ऐश्वर्य से युक्त के लिये (प्रजावतीः) बहुत प्रजाओंवाली (स्युः) होवें, वैसे आप लोगों के लिये भी हों ॥१॥
Essence
जो वृक्षों के लगाने और सुगन्ध आदि से युक्त धूम से पवन के किरणों को शुद्ध करें तो ये सब को सुखयुक्त करते हैं ॥१॥
Subject
अब मनुष्य किरणों के गुणों को जानें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥