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Rigveda Mandal 6 / Sukta 27 / Mantra 4

75 Sukta
8 Mantra
6/27/4
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ए॒तत्यत्त॑ इन्द्रि॒यम॑चेति॒ येनाव॑धीर्व॒रशि॑खस्य॒ शेषः॑। वज्र॑स्य॒ यत्ते॒ निह॑तस्य॒ शुष्मा॑त्स्व॒नाच्चि॑दिन्द्र पर॒मो द॒दार॑ ॥४॥

ए॒तत् । त्यत् । ते॒ । इ॒न्द्रि॒यम् । अ॒चे॒ति॒ । येन॑ । अव॑धीः । व॒रऽशि॑खस्य । शेषः॑ । वज्र॑स्य । यत् । ते॒ । निऽह॑तस्य । शुष्मा॑त् । स्व॒नात् । चि॒त् । इ॒न्द्र॒ । प॒र॒मः । द॒दार॑ ॥

Mantra without Swara
एतत्यत्त इन्द्रियमचेति येनावधीर्वरशिखस्य शेषः। वज्रस्य यत्ते निहतस्य शुष्मात्स्वनाच्चिदिन्द्र परमो ददार ॥

एतत्। त्यत्। ते। इन्द्रियम्। अचेति। येन। अवधीः। वरऽशिखस्य। शेषः। वज्रस्य। यत्। ते। निऽहतस्य। शुष्मात्। स्वनात्। चित्। इन्द्र। परमः। ददार ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 23 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) सूर्य के समान राजन् ! (परमः) श्रेष्ठ आप (यत्) जिसको (ददार) विदीर्ण करते हैं (त्यत्) उस (एतत्) इसको (ते) आपकी (वज्रस्य) बिजुली के समीप से (निहतस्य) गिराये गए का (इन्द्रियम्) मन (अचेति) जनाता है (येन) जिससे (वरशिखस्य) श्रेष्ठ शिखावाले (ते) आपका (शेषः) शेष है और आप (अवधीः) नाश करें और बिजुली (चित्) जैसे (शुष्मात्) बल और शोषण से (स्वनात्) शब्द से भय देती है, वैसे ही आप दुष्टों को भयभीत करिये ॥४॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो राजा बिजुली के समान पराक्रमी, विज्ञान को बढ़ानेवाला, न्याय के व्यवहार में सूर्य के सदृश प्रकाशित होता है, वही राजाओं में शिरोमणि समझना चाहिए ॥४॥
Subject
फिर राजा और प्रजा को कैसा वर्त्ताव करना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥