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Rigveda Mandal 6 / Sukta 27 / Mantra 2

75 Sukta
8 Mantra
6/27/2
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
सद॑स्य॒ मदे॒ सद्व॑स्य पी॒ताविन्द्रः॒ सद॑स्य स॒ख्ये च॑कार। रणा॑ वा॒ ये नि॒षदि॒ सत्ते अ॑स्य पु॒रा वि॑विद्रे॒ सदु॒ नूत॑नासः ॥२॥

सत् । अ॒स्य॒ । मदे॑ । सत् । ऊँ॒ इति॑ । अ॒स्य॒ । पी॒तौ । इन्द्रः॑ । सत् । अ॒स्य॒ । स॒ख्ये । च॒का॒र॒ । रणाः॑ । वा॒ । ये । नि॒ऽसदि॑ । सत् । ते । अ॒स्य॒ । पु॒रा । वि॒वि॒द्रे॒ । सत् । ऊँ॒ इति॑ । नूत॑नासः ॥

Mantra without Swara
सदस्य मदे सद्वस्य पीताविन्द्रः सदस्य सख्ये चकार। रणा वा ये निषदि सत्ते अस्य पुरा विविद्रे सदु नूतनासः ॥

सत्। अस्य। मदे। सत्। ऊँ इति। अस्य। पीतौ। इन्द्रः। सत्। अस्य। सख्ये। चकार। रणाः। वा। ये। निऽसदि। सत्। ते। अस्य। पुरा। विविद्रे। सत्। ऊँ इति। नूतनासः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 23 Mantra » 2

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Meaning
हे जिज्ञासु जनो ! (इन्द्रः) पूर्ण विद्यावला वैद्य (अस्य) इस सोमलता आदि बड़ी ओषधि समूह के (मदे) आनन्द में (सत्) प्रमाद से रहित सत्य ज्ञान (चकार) करे और (अस्य) इसके (पीतौ) पान करने में (सत्) प्रमाद से रहित सत्य ज्ञान को (उ) भी करे और (अस्य) इसके (सख्ये) मित्रपने में (सत्) प्रमादरहित सत्य ज्ञान को करे (ये, वा) अथवा जो (निषदि) बैठते हैं जिसमें उस गृह अर्थात् बैठक में (रणाः) रमते हुए(अस्य) इसके (सत्) प्रमादरहित सत्य ज्ञान को (विविद्रे) प्राप्त होते हैं (ते) वे (पुरा) पहिले (नूतनासः) नवीन जन (सत्) प्रमादरहित सत्य ज्ञान को (उ) ही प्राप्त होते हैं ॥२॥
Essence
मनुष्य लोग मादक द्रव्य के सेवन का त्याग करके सर्वदा बुद्धि, बल, आयु और पराक्रम के बढ़ानेवालों का सेवन करें, जिससे सदा ही सुख बढ़े ॥२॥
Subject
अब किस किस द्रव्य का सेवन करना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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