Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 25 / Mantra 8

75 Sukta
9 Mantra
6/25/8
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अनु॑ ते दायि म॒ह इ॑न्द्रि॒याय॑ स॒त्रा ते॒ विश्व॒मनु॑ वृत्र॒हत्ये॑। अनु॑ क्ष॒त्रमनु॒ सहो॑ यज॒त्रेन्द्र॑ दे॒वेभि॒रनु॑ ते नृ॒षह्ये॑ ॥८॥

अनु॑ । ते॒ । दा॒यि॒ । म॒हे । इ॒न्द्रि॒याय॑ । स॒त्रा । ते॒ । विश्व॑म् । अनु॑ । वृ॒त्र॒ऽहत्ये॑ । अनु॑ । क्ष॒त्रम् । अनु॑ । सहः॑ । य॒ज॒त्र॒ । इन्द्र॑ । दे॒वेभिः॑ । अनु॑ । ते॒ । नृ॒ऽसह्ये॑ ॥

Mantra without Swara
अनु ते दायि मह इन्द्रियाय सत्रा ते विश्वमनु वृत्रहत्ये। अनु क्षत्रमनु सहो यजत्रेन्द्र देवेभिरनु ते नृषह्ये ॥

अनु। ते। दायि। महे। इन्द्रियाय। सत्रा। ते। विश्वम्। अनु। वृत्रऽहत्ये। अनु। क्षत्रम्। अनु। सहः। यजत्र। इन्द्र। देवेभिः। अनु। ते। नृऽसह्ये ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 20 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (यजत्र) अत्यन्त श्रेष्ठ (इन्द्र) शत्रुओं के नाश करनेवाले राजन् ! आपको चाहिये कि (नृषह्ये) मनुष्यों से सहने योग्य संग्राम में (देवेभिः) विद्वानों के साथ (महे) बृहत् को (अनु, दायि) देवें और (ते) आपके (इन्द्रियाय) धन के लिये (ते) आपके (सत्रा) सत्य से (विश्वम्) सम्पूर्ण जगत् को (अनु) पश्चात् देवें और (वृत्रहत्ये) मेघ के नाश करने के समान सङ्ग्राम में (क्षत्रम्) राज्य वा धन को (अनु) पश्चात् देवें और (सहः) बल को (अनु) पश्चात् देवें और (ते) आपके मनुष्यों से सहने योग्य सङ्ग्राम में सुख को (अनु) पश्चात् देवें ॥८॥
Essence
हे क्षत्रियकुल में उत्पन्न हुए जन ! आप उत्तम कर्मों को करिये और उनके साथ अनुकूल हुए उनका धन आदि से निरन्तर सत्कार करिये और सदा ही सत्य के उपदेशक विद्वानों के सङ्ग से सम्पूर्ण राजविद्या को जानकर निरन्तर प्रचार करिये ॥८॥
Subject
फिर वह राजा क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥