Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 24 / Mantra 3

75 Sukta
10 Mantra
6/24/3
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अक्षो॒ न च॒क्र्योः॑ शूर बृ॒हन्प्र ते॑ म॒ह्ना रि॑रिचे॒ रोद॑स्योः। वृ॒क्षस्य॒ नु ते॑ पुरुहूत व॒या व्यू॒३॒॑तयो॑ रुरुहुरिन्द्र पू॒र्वीः ॥३॥

अक्षः॑ । न । च॒क्र्योः॑ । शू॒र॒ । बृ॒हन् । प्र । ते॒ । म॒ह्ना । रि॒रि॒चे॒ । रोद॑स्योः । वृ॒क्षस्य॑ । नु । ते॒ । पु॒रु॒ऽहू॒त॒ । व॒याः । वि । ऊ॒तयः॑ । रु॒रु॒हुः॒ । इ॒न्द्र॒ पू॒र्वीः ॥

Mantra without Swara
अक्षो न चक्र्योः शूर बृहन्प्र ते मह्ना रिरिचे रोदस्योः। वृक्षस्य नु ते पुरुहूत वया व्यू३तयो रुरुहुरिन्द्र पूर्वीः ॥

अक्षः। न। चक्र्योः। शूर। बृहन्। प्र। ते। मह्ना। रिरिचे। रोदस्योः। वृक्षस्य। नु। ते। पुरुऽहूत। वयाः। वि। ऊतयः। रुरुहुः। इन्द्र पूर्वीः ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 17 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (शूर) वीर पुरुष (पुरुहूत) बहुतों से आदर किये गये (इन्द्र) राजन् ! जैसे (ते) आपके (मह्ना) महत्त्व से (रोदस्योः) अन्तरिक्ष और पृथिवी के मध्य में (पूर्वीः) प्राचीन (वि, ऊतयः) विविध रक्षण आदि क्रियायें (चक्र्योः) पहियों की (अक्षः) धुरी के (न) समान (प्र, रुरुहुः) अच्छे प्रकार प्रकट होवें और हे (बृहन्) महान् (वृक्षस्य) वृक्ष की बढ़वार (नु) जैसे वैसे (ते) आपकी (वयः) अवस्था (रिरिचे) प्रकट होती है, उसको सब लोग जानें ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जैसे पहियों की धारण करनेवाली धुरी वृक्ष की शाखाओं के समान बढ़ती है और अन्तरिक्ष में स्थित होती हैं, वैसे सूर्य के चारों ओर सम्पूर्ण भूगोल घूमते हैं और वैसे ही न्याय के मार्ग से प्रजायें चलती हैं ॥३॥
Subject
फिर सूर्य और पृथिवी का कैसा वर्त्ताव है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥