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Rigveda Mandal 6 / Sukta 24 / Mantra 2

75 Sukta
10 Mantra
6/24/2
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ततु॑रिर्वी॒रो नर्यो॒ विचे॑ताः॒ श्रोता॒ हवं॑ गृण॒त उ॒र्व्यू॑तिः। वसुः॒ शंसो॑ न॒रां का॒रुधा॑या वा॒जी स्तु॒तो वि॒दथे॑ दाति॒ वाज॑म् ॥२॥

ततु॑रिः । वी॒रः । नर्यः॑ । विऽचे॑ताः । श्रोता॑ । हव॑म् । गृ॒ण॒तः । उ॒र्विऽऊ॑तिः । वसुः॑ । शंसः॑ । न॒राम् । का॒रुऽधा॑याः । वा॒जी । स्तु॒तः । वि॒दथे॑ । दा॒ति॒ । वाज॑म् ॥

Mantra without Swara
ततुरिर्वीरो नर्यो विचेताः श्रोता हवं गृणत उर्व्यूतिः। वसुः शंसो नरां कारुधाया वाजी स्तुतो विदथे दाति वाजम् ॥

ततुरिः। वीरः। नर्यः। विऽचेताः। श्रोता। हवम्। गृणतः। उर्विऽऊतिः। वसुः। शंसः। नराम्। कारुऽधायाः। वाजी। स्तुतः। विदथे। दाति। वाजम् ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 17 Mantra » 2

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Meaning
हे मनुष्यो ! जो (ततुरिः) शत्रुओं का मारनेवाला (वीरः) वीरता आदि गुणों से युक्त (नर्यः) मनुष्यों में श्रेष्ठ (विचेताः) अनेक प्रकार की बुद्धिवाला और (हवम्) प्रशंसा करने योग्य व्यवहार की (गृणतः) प्रशंसा करते हुओं के (श्रोता) विवादविषयक वचनों का सुननेवाला (उर्व्यूतिः) पृथिवी की रक्षा जिससे (नराम्) मनुष्यों का अग्रणी (वसुः) वास कराने और (शंसः) प्रशंसा करनेवाला (कारुधायाः) कारीगर धारण किये जाते जिससे वह (वाजी) विज्ञानवाला (स्तुतः) प्रशंसित हुआ (विदथे) संग्राम में (वाजम्) विज्ञान को (दाति) देता है, उसकी आप लोग सेवा करो ॥२॥
Essence
हे मनुष्यो ! तुम लोग जो मनुष्यों में उत्तम, अधिक बल और बुद्धि युक्त, यथार्थ का सुननेवाला तथा संग्राम में युद्धविद्या का देनेवाला है, उस ही का सदा सत्कार करो ॥२॥
Subject
फिर राजा और प्रजाजनों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

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