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Rigveda Mandal 6 / Sukta 21 / Mantra 4

75 Sukta
12 Mantra
6/21/4
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
यस्ता च॒कार॒ स कुह॑ स्वि॒दिन्द्रः॒ कमा जनं॑ चरति॒ कासु॑ वि॒क्षु। कस्ते॑ य॒ज्ञो मन॑से॒ शं वरा॑य॒ को अ॒र्क इ॑न्द्र कत॒मः स होता॑ ॥४॥

यः । ता । च॒कार॑ । सः । कुह॑ । स्वि॒त् । इन्द्रः॑ । कम् । आ । जन॑म् । च॒र॒ति॒ । कासु॑ । वि॒क्षु । कः । ते॒ । य॒ज्ञः । मन॑से । शम् । वरा॑य । कः । अ॒र्कः । इ॒न्द्र॒ । क॒त॒मः । सः । होता॑ ॥

Mantra without Swara
यस्ता चकार स कुह स्विदिन्द्रः कमा जनं चरति कासु विक्षु। कस्ते यज्ञो मनसे शं वराय को अर्क इन्द्र कतमः स होता ॥

यः। ता। चकार। सः। कुह। स्वित्। इन्द्रः। कम्। आ। जनम्। चरति। कासु। विक्षु। कः। ते। यज्ञः। मनसे। शम्। वराय। कः। अर्कः। इन्द्र। कतमः। सः। होता ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 11 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) दुःखविदारक विद्वान् ! (यः) जो (इन्द्रः) अत्यन्त ऐश्वर्य का करनेवाला (कुह) (स्वित्) कहीं (ता) उनको (चकार) करता है और (कासु) किन (विक्षु) प्रजाओं में (सः) वह (कम्) सुख को और (जनम्) मनुष्य को (आ, चरति) आचरण करता अर्थात् प्राप्त होता है और (ते) आपके (वराय) श्रेष्ठ (मनसे) विचारशील चित्त के लिये (कः) कौन (यज्ञः) मेल करना रूप यज्ञ (शम्) सुख को करता है और (कः) कौन (अर्कः) आदर करने योग्य और (कतमः) कौनसा (सः) वह (होता) दाता होता है, इनके उत्तरों को कहिये ॥४॥
Essence
हे विद्वान् ! उन बुद्धि की वृद्धियों को कौन कर सके, उपकार के लिये बुद्धियों में कौन चलता है, कौन आदर करने योग्य और कौन दाता होता है, इन प्रश्नों के समाधानों को कहिये ॥४॥
Subject
फिर मनुष्यों को विद्वानों के प्रति क्या-क्या पूँछना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥