Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 21 / Mantra 1

75 Sukta
12 Mantra
6/21/1
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
इ॒मा उ॑ त्वा पुरु॒तम॑स्य का॒रोर्हव्यं॑ वीर॒ हव्या॑ हवन्ते। धियो॑ रथे॒ष्ठाम॒जरं॒ नवी॑यो र॒यिर्विभू॑तिरीयते वच॒स्या ॥१॥

इ॒माः । ऊँ॒ इति॑ । त्वा॒ । पु॒रु॒ऽतम॑स्य । का॒रोः । हव्य॑म् । वी॒र॒ । हव्याः॑ । ह॒व॒न्ते॒ । धियः॑ । र॒थे॒ऽस्थाम् । अ॒जर॑म् । नवी॑यः । र॒यिः । विऽभू॑तिः । ई॒य॒ते॒ । व॒च॒स्या ॥

Mantra without Swara
इमा उ त्वा पुरुतमस्य कारोर्हव्यं वीर हव्या हवन्ते। धियो रथेष्ठामजरं नवीयो रयिर्विभूतिरीयते वचस्या ॥

इमाः। ऊँ इति। त्वा। पुरुऽतमस्य। कारोः। हव्यम्। वीर। हव्याः। हवन्ते। धियः। रथेऽस्थाम्। अजरम्। नवीयः। रयिः। विऽभूतिः। ईयते। वचस्या ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 11 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (वीर) भय से रहित जो (पुरुतमस्य) अतिशय बहुत गुणों से विशिष्ट (कारोः) कारीगर के (हव्यम्) देने योग्य को (हवन्ते) ग्रहण करते हैं और जो (इमाः) ये वर्त्तमान प्रजायें (हव्याः) देने योग्य (धियः) बुद्धियों को और जो (रथेष्ठाम्) रथ में स्थित होनेवाले (नवीयः) अतिशय नवीन (अजरम्) वृद्धावस्था से रहित शरीर को (रयिः) धन और (वचस्या) वचन में हुआ (विभूतिः) ऐश्वर्य (ईयते) प्राप्त होता है, उनसे युक्त (त्वा) आपका (उ) तर्क-वितर्क से हम लोग सत्कार करें ॥१॥
Essence
जो पुरुष प्रशंसा करने योग्य बुद्धि को स्वीकार करके उससे वृद्धावस्था और रोग से रहित अत्यन्त लक्ष्मी और ऐश्वर्य को प्राप्त होता है, उस शिल्पीजनप्रिय राजा का सत्कार करना चाहिये ॥१॥
Subject
अब बारह ऋचावाले इक्कीसवें सूक्त का प्रारम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में फिर उस राजा का किस अर्थ आश्रय करें, इस विषय को कहते हैं ॥